14 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बच्चों के दांत मजबूत करने के लिए दिए जाने वाले फ्लोराइड सप्लीमेंट्स को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब 3 साल से कम उम्र के बच्चों को यह सप्लीमेंट देने पर रोक होगी।
3 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी यह दवा तभी दी जा सकेगी जब दांत खराब होने का गंभीर खतरा हो। पहले ये दवाइयां 6 महीने के बच्चों को भी दी जाती थीं। हालांकि, FDA ने बाजार से इन दवाओं को हटाने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन चार फार्मा कंपनियों को चेतावनी पत्र भेजकर कहा है कि वे इन्हें पुराने नियमों के तहत न बेचें।
इन टैबलेट और लोजेंज का इस्तेमाल खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में होता था, जहां पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बहुत कम होती है। कुछ कंपनियां शिशुओं के लिए फ्लोराइड ड्रॉप भी बनाती हैं।
शुक्रवार को जारी एक वैज्ञानिक रिपोर्ट में FDA ने कहा कि फ्लोराइड सप्लीमेंट से बच्चों के दांतों को सीमित लाभ होता है, जबकि इसके साथ आंतों की समस्या, वजन बढ़ना और दिमाग से जुड़े जोखिम देखे गए हैं।
एजेंसी ने कहा,

जैसे फ्लोराइड दांतों पर बैक्टीरिया को खत्म करता है, वैसे ही यह आंतों के माइक्रोबायोम को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा हो सकते हैं।

FDA ने सभी दंत चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को इसके संभावित खतरे की चेतावनी वाला लेटर भी भेजा है।
दूसरी तरफ, अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (ADA) ने FDA के दावों से असहमति जताते हुए कहा कि निर्धारित मात्रा में फ्लोराइड का इस्तेमाल सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि इससे अधिकतम असर दांतों पर हल्के धब्बों के रूप में दिख सकता है, लेकिन कोई गंभीर खतरा नहीं होता।
कई दंत विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लीमेंट पर रोक से ग्रामीण इलाकों में बच्चों के दांतों की समस्याएं बढ़ सकती हैं, क्योंकि वहां पीने के पानी में फ्लोराइड की कमी रहती है।
वहीं, अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर पहले से ही फ्लोराइड को खतरनाक बता चुके हैं। उनका कहना है कि यह एक न्यूरोटॉक्सिन है और कई बीमारियों से जुड़ा हुआ है। वे अमेरिका में पीने के पानी में फ्लोराइड मिलाने की प्रथा खत्म करने की वकालत करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
अमेरिका में ट्रांसजेंडर सैनिकों पर नई नीति, सेना में बने रहना मुश्किल

अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने ट्रांसजेंडर सैनिकों को लेकर नई नीति लागू की है। इस नीति के तहत, पहले से प्रतिबंधित ट्रांसजेंडर सैनिकों के लिए सेना में अपनी सेवा जारी रखना और भी कठिन हो जाएगा।
समाचार एजेंसी AP के मुताबिक, 8 अक्टूबर को जारी एक मेमो में कहा गया है कि यदि सैन्य सेपरेशन बोर्ड किसी ट्रांसजेंडर सैनिक को सेना में बने रहने की अनुमति देता है, तो अब संबंधित कमांडर उस निर्णय को बदल सकते हैं। इससे पहले ये बोर्ड स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते थे और कमांडर हस्तक्षेप नहीं कर सकते थे।
नई नीति में यह भी कहा गया है कि ऐसे सैनिकों को सेपरेशन बोर्ड के समक्ष अपने जन्म के समय तय किए गए जेंडर के अनुसार यूनिफॉर्म पहनकर उपस्थित होना होगा। यदि कोई सैनिक ऐसा करने में असमर्थ होता है, तो उसकी अनुपस्थिति को भी उसके खिलाफ माना जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ट्रांसजेंडर सैनिकों के पास अब ऐसे यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं हैं, जिससे इस शर्त को पूरा करना लगभग असंभव हो जाएगा।
ट्रम्प प्रशासन ने इस नीति को सेना को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया कदम’ बताया है। हालांकि, इस निर्णय को कई अदालतों में चुनौती दी गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मई में फैसला दिया था कि मुकदमे लंबित रहने के बावजूद यह प्रतिबंध लागू रहेगा।
—————————-
31 अक्टूबर के वर्ल्ड अपडेट्स यहां पढ़ें…



























