स्टॉकहोम6 मिनट पहले
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दोनों विजेता अमेरिकी नागरिक हैं।
नोबेल प्राइज 2024 के लिए विजेताओं की घोषणा आज यानी सोमवार, 7 अक्टूबर से शुरू हो गई है। आज मेडिसिन या फिजियोलॉजी के क्षेत्र में नोबेल प्राइज की घोषणा की गई है। 2024 के मेडिसिन का नोबेल प्राइज विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को मिला है। उन्हें ये प्राइज माइक्रो RNA की खोज के लिए दिया गया है।
इंसान के शरीर में माइक्रो RNA के बिना सेल और टिश्यू डेवलेप नहीं हो सकते। हालांकि, माइक्रो RNA में असाधारण बदलाव होने की वजह से कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। माइक्रो RNA की जीन कोडिंग में म्यूटेशन होने की वजह से इंसानों के शरीर में सुनने की क्षमता, आंखों और शारीरिक बनावट में समस्या आती हैं।

7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक विज्ञान, अर्थशास्त्र, साहित्य और शांति जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले लोगों को नोबेल प्राइज दिया जाएगा। ये प्राइज स्वीडन के स्टॉकहोम में दिए जा रहे हैं। नोबेल प्राइज में 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर यानी लगभग 8.90 करोड़ रुपए का कैश प्राइज दिया जाएगा।
नींद से जगाकर नोबेल के बारे में बताया गैरी रुवकुन को नोबेल प्राइज के बारे में बताने के लिए जब फोन किया गया तो वो गहरी नींद में थे। नोबेल कमेटी ने उन्हें नींद से जगाकर प्राइज मिलने की जानकारी दी।

50 करोड़ सालों से विकसित हो रहा है माइक्रो RNA माइक्रो RNA जीन पिछले 50 करोड़ सालों से बहुकोशिकीय जीवों के जीनोम में विकसित हुआ है। अब तक इंसानों में अलग-अलग तरह के माइक्रो RNA के एक हजार से ज्यादा जीन की खोज हो चुकी है।
जीन RNA और DNA से मिलकर बनता है।RNA (राइबोन्यक्लिक एसिड) DNA में मौजूद जानकारियों का ट्रांसफर कोशिकाओं के प्रोटीन तक करता है। इसे लैब में मोडिफाई कर कई तरह की दवाईयां बनाई जा सकती हैं। क्योंकि इसकी संरचना में बदलाव किया जा सकता है।जबकि माइक्रो RNA जीन के व्यवहार को कंट्रोल किया जा सकता है।

123 साल से मिल रहा है नोबेल प्राइज 1901 में जब नोबेल प्राइज की शुरुआत हुई थी, तब से 2024 तक मेडिसिन की फील्ड में 229 लोगों को इससे सम्मानित किया जा चुका है।
पिछली बार मेडिसिन का नोबेल प्राइज कैटलिन कारिको और ड्रू वीसमैन को मिला था। नोबेल प्राइज देने वाली कमेटी ने कहा था कि इनकी दी गई mRNA टेक्नोलॉजी से बनी कोरोना वैक्सीन के जरिए दुनिया कोरोना महामारी से निकल पाई। दरअसल, कोरोना के वक्त पहली बार ऐसा हुआ था जब mRNA टेक्नोलॉजी पर बेस्ड वैक्सीन बनी थी। इसे फाइजर, बायो एन टेक और मॉडर्ना ने बनाया था
नोबेल प्राइज पर एक नजर…




























