
महाकुंभ
Mahakumbh 2025: जब से संसार है तब से सनातन है। वास्तव में देखा जाए तो धर्म केवल सनातन ही है। उन्होंने कहा कि भारत में और सनातन धर्म में पैदा हुए हर व्यक्ति भाग्यवान है। इसके साथ ही कृष्ण चंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत की धरती पर पैदा हुए सभी धर्म एक अर्थ में सनातनी ही हैं। सनातन में निर्गुण उपासना भी है और सगुण उपासना भी है। यही नीति जैन और बौद्ध धर्म में भी देखने को भी मिलती है।
वैदिक हिंदू सनातन धर्म है पूरी तरह वैज्ञानिक
कृष्ण चंद्र शास्त्री ने कहा कि वैदिक हिंदू सनातन धर्म सबसे वैज्ञानिक धर्म है। उन्होंने बताया कि भारत में ही सबसे पहले हवाई जहाज का निर्माण हुआ था और इसकी गवाही हमारे शास्त्र देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण को चुकाने के लिए या यूं कहें इनके प्रकति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए जनेऊ धारण किया जाता है। वो कहते हैं कि इसीलिए जनेऊ में तीन धागे होते हैं। वो उदाहरण देते हैं कि सूर्य देव हमें उर्जा देते हैं इसलिए उन्हें हमें हमेशा प्रणाम करना चाहिए। ऋषि हमें ज्ञान देते हैं और पितरों के चलते ही हमारा मानव जीवन संभव हुआ है। यानि जनेऊ धारण करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण हैं।
कर्म को बताया आवश्यक
शास्त्री जी ने कहा कि हमें कर्म प्रधान होना चाहिए। भाग्य के सहारे हमें नहीं बैठना चाहिए। हमें ज्ञान अर्जित करना चाहिए और हमें लोक व्यवहार सीखना चाहिए यही ज्ञान हमारे ऋषियों ने हमें दिया है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें वेद पुराणों का पठन पाठन करना चाहिए। शास्त्री जी ने कहा कि वेद की रचना किसी मनुष्य ने नहीं लिखे बल्कि स्वयं ब्रह्मा की ये देन हैं। वेद के बाद जिस धार्मिक ग्रंथ को शास्त्री जी ने बेहद पवित्र बताया वो है रामायण।


























