-24 से ज्यादा मुद्दों पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने दिए प्रस्ताव
-अलग-अलग मुद्दा उठाने के लिए अलग-अलग विधायक को दी जिम्मेदारी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यमुनानगर और अंबाला में जहरीली शराब से हुईं मौतों के साथ बेटियों की सुरक्षा और बेरोजगारी के मुद्दों पर कांग्रेस हरियाणा सरकार को सदन के अंदर घेरेगी। इस संबंध में बुधवार को यहां नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में रणनीति तैयार की गई। कांग्रेस की ओर से कुल 24 मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रस्ताव दिए गए हैं। एक-एक मुद्दा उठाने के लिए कांग्रेस ने अलग-अलग विधायकों को जिम्मेदारी दी है। विधानसभा सत्र शुरू होने से एक दिन पूर्व 14 दिसंबर को भी कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी।
हुड्डा के आवास पर हुई बैठक में प्रदेश के ताजा मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान भी विशेष रूप से मौजूद रहे। विधायकों ने बैठक में पांच राज्यों के चुनावी नतीजों पर मंथन किया। साथ ही आने वाले विधानसभा सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस विधायकों की तरफ से यमुनानगर और अंबाला में जहरीली शराब से हुईं मौतों, किसानों के बकाया मुआवजे, उचाना में छात्राओं के यौन शोषण, खनन घोटाले, कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, अस्पतालों में डॉक्टर व स्टाफ की कमी, बढ़ते भ्रष्टाचार, शिक्षा के गिरते स्तर, पंचायती जमीन, बढ़ते प्रदूषण, गुरुग्राम में प्रदूषित सिंचाई जल सप्लाई, खेल नीति में बदलाव जैसे मुद्दों पर स्थगन और ध्यानाकर्षक प्रस्ताव दिए जाएंगे।
इसके अलावा सीईटी, भर्तियों के पेपर लीक, वेटरनरी सर्जन भर्ती घोटाला, लटकी पड़ी भर्तियों, कौशल रोजगार निगम की कच्ची भर्तियों में आरक्षण की अनदेखी, फसलों के मुआवजे, धान व अन्य फसलों की एमएसपी पर खरीद ना होना, खाद और बीज की कमी, बढ़ते नशे, बेरोजगारी के चलते युवाओं के पलायन, पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारों के हनन, गरीब लोगों के बीपीएल कार्ड काटने, कृषि मंत्री के किसानों बारे शर्मनाक बयान, स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अपने विभाग का काम छोड़ने समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रस्ताव दिए जाएंगे।
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सरकार के पास नाकामियों का जवाब नहीं : हुड्डा
कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा-जजपा के पास जनता के सवालों और सरकार की नाकामियों का कोई जवाब नहीं है। इसलिए वह सिर्फ तीन दिन का विधानसभा सत्र बुलाकर चर्चा की औपचारिकता कर रही है। जबकि प्रदेश के मुद्दों पर चर्चा के लिए लंबा समय चाहिए।



























