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नई दिल्ली12 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2017 को तत्काल तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दा) असंवैधानिक घोषित किया था।
तीन तलाक कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने सोमवार (19 अगस्त) को अपना जवाब दाखिल किया। केंद्र ने हलफनामें में कहा- तीन तलाक जैसी प्रथा शादी जैसी सामाजिक संस्था के लिए घातक है।
शीर्ष कोर्ट के इस प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने के बावजूद मुस्लिम समुदाय ने इसे खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। केंद्र ने कहा कि संसद ने अपने विवेक से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून बनाया है।
यह शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं के जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वैलिटी को सुनिश्चित करने में मदद करता है। साथ ही नॉन-डिस्क्रिमिनेशन और इंपावरमेंट के मौलिक अधिकारों को पूरा करने में मदद करता है।
तीन तलाक देने पर 3 साल की सजा
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2017 को तत्काल तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दा) असंवैधानिक घोषित किया था। वहीं, केंद्र सरकार ने 30 जुलाई 2023 को तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया था। इसमें तीन तलाक को क्रिमिनलाइज करके 3 साल की सजा का प्रावधान किया गया।
कानून के खिलाफ दो मुस्लिम संगठनों- जमीयत उलमा-ए-हिंद और समस्त केरल जमीयतुल उलेमा ने याचिका लगाई थी। याचिका में इसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
जमीयत का दावा है कि एक धर्म में तलाक के तरीके को अपराध बनाना और अन्य धर्मों में केवल सिविल कानून के दायरे में रखना भेदभाव भरा है। यह आर्टिकल 15 के खिलाफ है।



























