तिराना7 घंटे पहले
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अल्बानिया के तिराना में गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने कई जगह तोड़फोड़ की।
अल्बानिया की राजधानी तिराना में महंगी शिक्षा और खराब सुविधाओं के खिलाफ अब छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। छात्र प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, सरकारी इमारतों और कई बैंकों की शाखाओं में आग लगा दी।
भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी का इस्तेमाल किया। इस दौरान दर्जनों पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए। अल्बानिया में जारी यह विरोध ऐसे समय हो रहा है, जब भारत, फ्रांस, जर्मनी समेत दुनिया के कुल 11 देशों में छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
अल्बानिया में प्रदर्शन से जुड़ी 5 तस्वीरें…
प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को सड़क पर आग लगा दी। एक शख्स गाड़ी पर चढ़कर झंडा फहरा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद छात्र भागते भी नजर आए।
छात्रों ने कई इमारतों में तोड़फोड़ की।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ गुरुवार को तिराना में जुटी।
कई प्रदर्शनकारियों को इमारतों का सामान बाहर निकालकर फेंकते हुए भी देखा गया। पीछे खड़े लोग ताली बजाकर उनका समर्थन भी कर रहे थे।
कई महीनों से नाराज थे छात्र, सरकार पर अनदेखी का आरोप
अल्बानिया में छात्रों की नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी है। वे कई महीनों से पढ़ाई के बढ़ते खर्च और डिग्री लेने के बाद नौकरी मिलने की कम संभावनाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा महंगी होती जा रही है, जबकि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार के पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने बातचीत करने के बजाय उनकी छवि खराब करने की कोशिश की।
ट्रम्प के दामाद के लग्जरी रिसॉर्ट बनाने का भी विरोध
एदी रामा 2013 से अल्बानिया के प्रधानमंत्री हैं। पिछले साल मई में वे चौथी बार इस पद पर चुने गए थे। हालांकि, इसके बाद उनकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी है। मौजूदा प्रदर्शन रामा के लिए अब तक के सबसे गंभीर जन विरोध में से एक माने जा रहे हैं।
सरकार के खिलाफ विरोध कुछ महीने पहले ही शुरू हो गया था। इसकी एक वजह देश के दक्षिणी तट पर लग्जरी रिसॉर्ट बनाने की योजना भी है। इस परियोजना से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर जुड़े हैं।
गुरुवार को रॉयटर्स से बातचीत में रामा ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि सरकारें लोकतांत्रिक चुनावों से बदलती हैं। पिछले साल देश में चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं।
मुस्लिम बहुल अल्बानिया में बार-बार कैसे जीत रहे एडी रामा

मई 2025 में अल्बानिया आम चुनाव में वोटिंग करते हुए एडी रामा।
- अल्बानिया में मुस्लिम समुदाय की कुल आबादी करीब 51% है। इसके बावजूद ईसाई धर्म को मानने वाले ईडी रामा लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री बने हैं। वह 2013 से देश की सत्ता में हैं।
- दरअसल, अल्बानिया की राजनीति में धर्म मुख्य मुद्दा नहीं है। इसकी एक अहम वजह देश का कम्युनिस्ट शासन वाला इतिहास है। यहां 1944 से 1985 तक एनवर होझा के नेतृत्व में कम्युनिस्ट शासन रहा। उनकी मौत के बाद भी कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में बनी रही।
- होझा के शासनकाल में 1967 में अल्बानिया को आधिकारिक तौर पर नास्तिक राज्य घोषित कर दिया गया था। धार्मिक संस्थाओं और गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए।
- नब्बे के दशक में कम्युनिस्ट शासन खत्म होने के बाद धार्मिक स्वतंत्रता लौटी, लेकिन राजनीति में धर्म के बजाय वामपंथी और दक्षिणपंथी दलों के बीच मुकाबला प्रमुख बना रहा।
- हालांकि, अल्बानिया में ईसाई धर्म से जुड़ी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी भी है। हालांकि, 2025 के आम चुनाव में यह संसद में एक भी सीट नहीं जीत सकी।
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