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800 से अधिक धावक 14 हजार 500 फीट की ऊंचाई में मैराथन दौड़ मेें हिस्सा लेंगे।
उत्तराखंड अपनी राज्य रजत जयंती उत्सव के मौके पर इतिहास रचने जा रहा है। 14,500 फीट ऊंचाई वाली जगह पर 800 से अधिक धावक इसके गवाह बनेंगे। इससे पहले देश में लद्दाख के 19 हजार फीट की ऊंचाई वाले इलाके उमलिंगला टॉप में भारत की सबसे ऊंचाई वाली जगह पर अल्ट्रा
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उत्तराखंड में यह मौका पहला है, जब चीन-नेपाल बॉर्डर पर स्थित पिथौरागढ़ के हिच्च हिमालयी क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल पर धावक दौड़ लगाएंगे। इस दौड़ का आयोजन 10500 फीट की ऊंचाई से लेकर 14500 फीट की ऊंचाई तक होगा। मैराथन की शुरुआत आदि कैलाश के पास जोलिंगकोंग से होगी। इसके बाद धावक गुंजी की ओर बढ़ेंगे और फिर कालापानी जाएंगे। वहां से वे वापस गुंजी लौटेंगे, जहां मैराथन का समापन होगा। अल्ट्रा मैराथन के लिए 800 से अधिक धावकों ने अपना पंजीकरण कराया है। मैराथन के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा और चिकित्सा सहायता के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर और एम्बुलेंस शामिल हैं।
पहले जानिए आदि कैलाश मैराथन क्यों है खास…
ऊंचाई वाली अल्ट्रा मैराथन यह मैराथन उत्तराखंड की पहली और देश की दूसरी सबसे ऊंचाई वाली जगह में आयोजित हो रही है। गुंजी से शुरू होकर व्यास घाटी के चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाकों में आयोजित की जा रही है। जिससे यह कठिन दौड़ बन जाती है।
साहसिक पर्यटन को बढ़ावा इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन और रोमांच को बढ़ावा देना है। आदि कैलाश राज्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही राजस्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य यह मैराथन प्रतिभागियों को आदि कैलाश की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व का अनुभव करने का मौका देती है।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान इस मैराथन के आयोजन से आदि कैलाश क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलती है।
विभिन्न श्रेणियों में दौड़ मैराथन में विभिन्न श्रेणियों जैसे 60 किमी अल्ट्रा, 42 किमी फुल मैराथन, 21 किमी हाफ मैराथन, 10 किमी और 5 किमी में प्रतियोगिताएं हो रही हैं, जो विभिन्न आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के धावकों को आकर्षित करती हैं।
14000 फीट से अधिक ऊंचाई वाली कुछ मैराथन… उमलिंगला टॉप अल्ट्रा मैराथन (लद्दाख, भारत)- यह उमलिंगला टॉप पर आयोजित की गई दुनिया की सबसे ऊंची अल्ट्रा मैराथन है, जो 19,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर है।
पाइक्स पीक मैराथन (कोलोराडो, अमेरिका)- यह एक अत्यंत कठिन मैराथन है। जो 14,115 फीट की ऊंचाई तक जाती है।
खारदुंग ला चैलेंज (लद्दाख, भारत)- यह दुनिया की सबसे ऊंची अल्ट्रा मैराथन में से एक है, जो 14000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर होती है।
इंका ट्रेल मैराथन (पेरू)- यह दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण मैराथन में से एक मानी जाती है, जिसमें मार्ग लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचता है।
विजेताओं को किया जाएगा पुरस्कृत 60 किलोमीटर की ओपन दौड़ के विजेता महिला और पुरुष को दो-दो लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। पहले पांच स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को 2 लाख, 1.25 लाख, 75 हजार रुपए, 65 हजार रुपए, 45 हजार रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसी तरह अन्य वर्गों में भी लाखों रुपए के पुरस्कार बटेंगे। दौड़ 60 वर्ष से अधिक, 50 से 60 ए वर्ग, 40 से 50 आयु वर्ग के साथ ही उत्तराखंड के 18 से 40 आयु वर्ग के युवा, सुरक्षा बलों के जवान और सरकारी कर्मचारी के लिए भी कराई जा रही है।
आदि कैलाश का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व…
शिव और पार्वती का निवास- हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार आदि कैलाश भगवान शिव और पार्वती का निवास स्थान माना जाता है।
पौराणिक कथाएं- स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव और पार्वती ने इस पर्वत पर अपना विवाह किया था। यह भी माना जाता है कि भगवान शिव ने यहां ध्यान किया था, जिससे यह आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक पवित्र स्थान बन गया है।
रामायण और महाभारत- ऐसा कहा जाता है कि रावण, पांडवों और ऋषि वेद व्यास ने भी यहां तपस्या की थी। इसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है क्योंकि यह तिब्बत में स्थित प्रसिद्ध कैलाश पर्वत की प्रतिकृति है। जो लोग कैलाश पर्वत की कठिन यात्रा नहीं कर सकते, उनके लिए यह एक समान आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।




























