बर्मिंघम, अलबामा11 घंटे पहले
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तस्वीर हत्या के दोषी जेमी मिल्स की है, जिसे 20 साल पहले गिरफ्तार किया गया था।
अमेरिका के अलबामा राज्य में एक बूढ़े दंपति की पीट-पीटकर हत्या करने के दोषी जेमी रे मिल्स को गुरुवार को जहरीले इंजेक्शन के जरिए मौत की सजा दी जाएगी। दंपति की हत्या करने के लिए जेमी ने हथौड़े, टायर टूल और धारदार चाकू का इस्तेमाल किया था। हत्या के बाद जेमी दंपति के घर से कुछ दवाएं और 11 हजार रुपए लेकर उनके घर से फरार हो गया था।
50 साल का जेमी पिछले 20 सालों से अलबामा की जेल में बंद है। उसे साल 2004 में हत्या का दोषी माना गया था। जेमी ने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से मामले में दखल देने की मांग की है। हालांकि, अलबामा के अटॉर्नी जनरल स्टीव मार्शल ने जेमी को मौत की सजा दिए जाने के जुड़ी प्रक्रिया को जारी रखने का आदेश दिया है।

तस्वीर लीथल डेथ इंजेक्शन टेबल की है। इस पर दोषी को लेटाकर उसके हाथ-पैर और शरीर को बांधा जाता है फिर इंजेक्शन लगाया जाता है।
घर के बैकयार्ड में खून से लथपथ मिला था शव
जेमी ने साल 2004 में अलबामा के बर्मिंघम शहर में रहने वाले फ्लॉयड हिल और उनकी पत्नी वेरा हिल की हत्या की थी। दरअसल, वेरा डायबिटीज की मरीज थीं। उनकी तबियत अकसर खराब रहती थी। एक दिन दंपति की पोती उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही थी। काफी समय तक कॉन्टैक्ट न होने पर पोती ने अलबामा की पुलिस को मामले की सूचना दी।
इसके बाद फ्लॉयड-वेरा के घर पहुंचने पर पुलिस को उनके बैकयार्ड में दोनों के खून से लथपथ शव बरामद हुए थे। सिर पर बार-बार हमला होने की वजह से फ्लॉयड की मौत हो गई थी। वहीं वेरा को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 12 हफ्तों के बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया था।
डेथ चैंबर में स्ट्रैचर से बांधकर लगाया जाता है इंजेक्शन
जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा देने के लिए सबसे पहले दोषी को डेथ चेंबर में ले जाया जाता है। इसके बाद उसे एक स्ट्रैचर पर लेटाकर हाथ पैर और शरीर बांध दिया जाता है। चैंबर के एक तरफ शीशे की दीवार होती है, जिसके उस पार से दोषी पर नजर रखी जाती है। इंजेक्शन देने के बाद दोषी की तड़प-तड़पकर मौत हो जाती है।
अमेरिका के इडाहो में रेप के एक मामले में दोषी व्यक्ति को फरवरी में इसी तरह मौत की सजा देने की कोशिश की गई थी। हालांकि, मरीज को इंजेक्शन देने के लिए नर्स 1 घंटे तक सही नस नहीं ढूंढ पाई थी, जिसके बाद इसे टाल दिया गया था।

7 दिसंबर को 1982 को चार्ल्स ब्रूक्स जूनियर जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा पाने वाला पहला दोषी बना था।
40 साल पहले पहली बार इस्तेमाल
7 दिसंबर को 1982 को चार्ल्स ब्रूक्स जूनियर जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा पाने वाला पहला दोषी बना था। अमेरिका के टेक्सॉस में दवाओं के कॉकटेल को ब्रूक्स के शरीर में डाला गया था, जिससे उसका दिमाग और शरीर सुन्न पड़ गया, वो पैरालाइज हो गया और दिल की धड़कनें रुकने से उसकी मौत हो गई।
जहरीले इंजेक्शन के जरिए हुई इस पहली मौत ने इस बात को लेकर आम लोगों और डॉक्टरों के बीच बहस छेड़ दी थी कि मौत की सजा देने का यह तरीका सही और मानवीय है या नहीं? हालांकि, जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा देने का सिलसिला आज भी जारी है।
जहरीले इंजेक्शन को सजा-ए-मौत देने के दूसरे तरीकों जैसे गैस, बिजली के झटके या लटकाने की तुलना में अधिक मानवीय माना जाता था। इसके पीछे तर्क ये था कि इस इंजेक्शन में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से एक से गहरी बेहोशी आ जाती है, इससे मरने वाले को दर्द नहीं होता। हालांकि, नैतिकता का उल्लंघन मानते हुए कई डॉक्टर जहरीले इंजेक्शन के विरोध में थे, लेकिन इसके बावजूद इसके इस्तेमाल को मंजूरी मिली।

























