
अदालत(सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला
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बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म व हत्या मामले से जुड़े सूरज लॉकअप हत्याकांड में कोर्ट ने फैसले में कहा कि पुलिस हिरासत में यातना से मौत सभ्य समाज में जघन्य अपराध है। ऐसे दोषियों पर नरमी नहीं बरती जा सकती। अनुच्छेद 21 के तहत मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। इससे दोषियों, विचाराधीन बंदियों और हिरासत में कैदियों को वंचित नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते कहा कि हिरासत में हिंसा (यातना और लॉकअप में मौत) व्यक्ति के अधिकारों पर आघात है। हिरासत में यातना केवल शारीरिक दर्द ही नहीं है, यह मानसिक पीड़ा है।









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