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Punjab water dispute
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
SYL Canal Dispute: पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के लिए शुरू हुआ सियासी घमासान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जल विवाद को लेकर दोनों राज्यों की सरकारें आमने-सामने हैं। सीएम भगवंत मान ने जहां हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने से इन्कार कर दिया है, वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री का आरोप है कि पंजाब वादे के मुताबिक उसे 8500 क्यूसेक पानी जारी नहीं कर रहा है।
विशेषज्ञों की माने तो राजनीतिक के साथ ही इस विवाद के अन्य कारण भी हैं, जिससे यह और गहराता जा रहा है। रावी, ब्यास और सतलुज से हर साल पंजाब को 35 अरब घन मीटर के करीब पानी मिलता है, जिसका आगे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच बंटवारा होता है।
पंजाब को प्रमुख रूप से सिंचाई के लिए सबसे अधिक पानी चाहिए। पिछले कुछ समय से सूबे में नहरी पानी का उपयोग बढ़ा है, जिस कारण दूसरे राज्यों को जाने वाले अतिरिक्त पानी पर सूबे ने रोक लगानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की माने तो पंजाब को 40 अरब घन मीटर से ऊपर पानी सिंचाई के लिए चाहिए।
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य 26.24 अरब घन मीटर भूजल का उपयोग हर साल सिंचाई के लिए कर रहा है। इस कारण भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यही कारण है कि पंजाब सरकार नहरी पानी का अधिकतम उपयोग सिंचाई के लिए करना चाहती है, जिस कारण वह हरियाणा को अतिरिक्त पानी को देने के लिए तैयार नहीं हो रही है।



























