
नाटक के मंचन के दौरान कलाकार।
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चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में नाटक मास्टर जी का मंचन हुआ। इस नाटक की यहां 82वीं प्रस्तुति रही।

रूपक कला एंड वेलफेयर सोसाइटी से आयोजित नाटक का लेखन राणा रणवीर और जसवंत जफर ने किया है। नाटक में गंभीर बातों के अलावा हास्य भी है।

सबसे रोमांचक मोड़ तब आता है जब डायरेक्टर मास्टर बनकर आता है तो उसी कैरेक्टर में डूब जाता है।

नाटक में लोगों की जिंदगी से जुड़ी चीजों के बारे में जिक्र किया है। सोशल मीडिया व्हाट्सएप, फेसबुक इंस्टाग्राम जैसी बनाई अपनी जेलों से आजादी दिलाने की बात करता है।

नाटक की शुरुआत दो रंगकर्मी से होती है। एक डायरेक्टर और एक एक्टर है। नाटक के लिए डायरेक्टर को दूसरा कैरेक्टर नहीं मिल रहा है। यह कैरेक्टर है मास्टर का। पता चलता है कि नाटक लिखा ही नहीं गया है। पहला दिन रिहर्सल का है। स्क्रीप्ट तैयार नहीं है। एक्टर को सिचुएशन के बारे में बताता है और एक सीन करने को कहता है। एक्टर को सीन करना नहीं आ रहा है। एक्टर समझता है कि दूसरा एक्टर होगा तो मुझे पता चलेगा। डायरेक्टर थोड़ी देर के लिए मास्टर बनता है।

जब डायरेक्टर मास्टर बनकर आता है तो उसी कैरेक्टर में डूब जाता है। नाटक का अंत में सोशल मीडिया, पढ़ाई की बात, खराब व्यवहार, धर्म की कट्टरता, बहम और भरम से निकालने की बात, गुरु नानक देव के संदेश और भगत सिंह के बारे में बात हुई। नाटक में कोई सेट भी नहीं था। नाटक के दौरान गायिकी, डांस, रुदन, हंसी, घृणा और गुस्सा को भी दिखाया गया।




























