इंफाल28 मिनट पहले
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मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए सुरक्षाबल सख्त अभियान चला रहे हैं। इससे बौखलाए कुकी उग्रवादी समूहों ने राज्य को एक बार फिर अशांत करने की साजिश शुरू कर दी है। कुकी उग्रवादियों न सेनापति जिले के नगा बहुल इरेंग नगा गांव में कुकी लैंड और दूर रहो लिखकर केंद्र और राज्य सरकारों को खुली चुनौती दी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बीते दिनों रात के समय अज्ञात हथियारबंद लोग गांव में दाखिल हुए और तोड़-फोड़ करते हुए मेमोरियल स्टोन पर नारा लिख दिया। गांव वालों ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके चलते क्षेत्र में नए सिरे से अशांति फैलने की आशंका गहरा गई है।
खुद को टाइगर किप्गेन उर्फ थांग्बोई/हाउगेंथांग किप्गेन बताने वाले केएनएफ-पी के कमांडर ने गांव के चेयरमैन को फोन कर हत्या और पूरे गांव को जला देने की धमकी दी।
चूराचांदपुर रोड किया ब्लॉक
घटना के बाद नगा ग्रामीणों ने शनिवार को कंग्पोक्पी-चूराचांदपुर रोड को ब्लॉक कर दिया। लियांग्माई नगा काउंसिल और नगा पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (NPO) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी हैै। कई नगा संगठनों ने जॉइंट ट्राइबल बॉडीज के साथ मिलकर ट्रैफिक और ट्रेड ब्लॉकेड की धमकी दी है।
मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। हिंसा के बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफे दे दिया था। केंद्र ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया है।

3 मई 2023 को हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ मार्च हुआ और फिर हिंसा भड़क गई थी।
4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह…
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।
- कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।
- मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।
- नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।
- सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।



























