- Hindi News
- National
- India Trapped In Modern day ‘chakravyuh’, 6 Running It: Rahul Gandhi Targets PM
2 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का भाषण महाभारत क़ालीन चक्रव्यूह और पद्म व्यूह पर केंद्रित रहा। हालाँकि वर्तमान राजनीति से इसका कितना संबंध है, यह तो समझ नहीं आता लेकिन राजनीति चाहे किसी भी दल की हो, एक चक्रव्यूह की तरह ही होती है। सही है यहाँ एक- दूसरे को मात देने या पटकनी देने के लिए व्यूह रचनाएँ की जाती होंगी, लेकिन अभिमन्यु की तरह किसी को जान से मारने की साज़िश नहीं की जा सकती।
राहुल गांधी ने जो तुलनाएँ की, वे निश्चित रूप से अतिरेक या अतिशयोक्ति कही जा सकती हैं। जहां तक चक्रव्यूह और पद्म व्यूह का सवाल है, कई लेखकों ने इन दोनों को एक ही बताकर भ्रम पैदा किया है। महाभारत क़ालीन संजय जब महाराज धृतराष्ट्र को वृतांत सुनाते हैं, उसके अनुसार गुरू द्रोण ने चक्रव्यूह की रचना युद्ध के तेरहवें दिन की थी और पद्म व्यूह की रचना पंद्रहवें दिन।

राहुल ने अंबानी-अडाणी का नाम लिया तो स्पीकर ने कहा कि जो लोग सदन के सदस्य नहीं है, उनका नाम न लें। इसके बाद राहुल ने मुंह पर हाथ रख लिया।
राहुल गांधी ने दोनों युद्ध रचनाओं को एक ही तरह की बताया जबकि ये दोनों अलग- अलग थीं। पद्म व्यूह में एक गाड़ी या रथ का आकार होता है। बीच में एक कमल का आकार होता है। कमल के बीचोंबीच एक सुई के आकार की रचना की जाती है। लेकिन कमल के फूल में तो कोई सुई नहीं होती। इसलिए कमल के फ़ूल को युद्ध से, बल्कि मारक युद्ध से जोड़ना कितना जायज़ है, कहा नहीं जा सकता।

राहुल ने कहा कि 20 अफसरों ने मिलकर हिंदुस्तान का बजट बनाया है, जिसमें सिर्फ एक माइनॉरिटी और एक OBC अफसर है।
नेता प्रतिपक्ष ने महाभारतकालीन इन व्यूहों का सहारा लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधना चाहा है। … और फिर वो बजट पूर्व हलवा परम्परा में वित्तमंत्री के साथ खड़े लोगों को जाति आधारित संरचना बताना तो कहीं से भी तार्किक नहीं लगता। इस सेरेमनी में तो उस वक्त मंत्रालय के जो सीनियर अफ़सर होते हैं, वे ही मौजूद रहते हैं। इसमें जातिवाद कहाँ से आया, यह बात समझ से परे है। यही वजह है कि हलवा परम्परा की जब राहुल गांधी अपनी तरह से विवेचना कर रहे थे, तब वित्त मंत्री ने माथा पकड़ लिया था।

लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सिर पकड़े हुए दिखाई दीं।
ठीक है, आप देश में जातिवादी जनगणना के पक्षधर हैं, लेकिन इसके लिए परम्पराओं का इस तरह विश्लेषण करना ठीक नहीं है। बढ़ई का उदाहरण देकर राहुल ने कहा – जो टेबल वो बनाता है उसके शो रूम में तो वह घुस भी नहीं सकता लेकिन ये हालात तो उस बढ़ई की कांग्रेस राज में भी थी। फिर आज ये हालात बताकर वे क्या कहना चाहते हैं?



























