फतेहाबाद के अंकित और विजय रूस में फंसे हुए हैं। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दिखाते सामाजिक कार्यकर्ता जयभगवान डांगी और उनके साथी।
रूस-यूक्रेन युद्ध में हरियाणा के 6 युवक फंसे हुए हैं। इनमें फतेहाबाद के 2, कैथल, हिसार, रोहतक और जींद का एक-एक युवक शामिल है। महीनों से इन युवकों का परिवार से संपर्क नहीं हो पाया है। सभी युवक स्टडी वीजा या कमाने के लिए रूस गए थे। इनके परिवार का आरोप
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इन युवकों के परिवार के सदस्य आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में हरियाणा के अलावा राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र और हैदराबाद के परिवार भी शामिल होंगे। यह प्रदर्शन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा।
जींद और कैथल के लापता युवक कौन हैं, अभी इनका पता नहीं लग पाया है। हिसार के मदनहेड़ी गांव के सोनू (28) और कैथल के कर्मचंद (22) की वहां मौत हो चुकी है। सोनू की मौत यूक्रेन में ड्रोन हमले के कारण हुई।

रोहतक के तैमूरपुर गांव का संदीप भी रूस में फंसा हुआ है। उसने परिवार को वीडियो भेजकर कहा था कि उसकी जान को खतरा है।
रोहतक के जयभगवान के नेतृत्व में होगा प्रदर्शन रोहतक के मदीना गिंधरान गांव के सामाजिक कार्यकर्ता जयभगवान डांगी ने इन परिवारों की मदद करने का फैसला किया है। उन्होंने यूक्रेन में फंसे युवकों के परिवारों को मिलाकर एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के 27 परिवारों को जोड़ा गया है।
विदेश राज्यमंत्री से भी मिलेंगे जयभगवान ने बताया कि हरियाणा के 6, राजस्थान के 4 और पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर के भी कुछ युवक यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति ली है। प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई जाएगी, ताकि केंद्र सरकार और गंभीरता से प्रयास करे। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन के ऑफिस भी जाएंगे। उनसे मिलकर उन्हें पूरी स्थिति बताई जाएगी।

युवकों की लिस्ट दिखाते सामाजिक कार्यकर्ता जयभगवान।
अब रूस में फंसे हरियाणा के युवकों के बारे में जानिए….
फतेहाबाद का विजय 2024 और अंकित 2025 में रूस गया फतेहाबाद जिले के कुम्हारिया गांव के 2 युवक अंकित जांगड़ा और विजय पूनिया जबरन रशियन आर्मी में भर्ती कर यूक्रेन युद्ध में धकेल दिए गए। इन युवकों का पिछले करीब डेढ़ महीने से ज्यादा समय से परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ है। आखिरी बार 11 सितंबर को अंकित का अपने भाई रघुवीर के पास मैसेज आया था।
अंकित जांगड़ा के परिवार में उसके पिता रामप्रसाद जांगड़ा, मां सुशीला देवी और बड़ा भाई रघुवीर जांगड़ा है। अंकित के पिता रामप्रसाद राजमिस्त्री हैं, जबकि मां गृहिणी है। वहीं, इसी गांव के विजय पूनिया के पिता का निधन हाे चुका है। अब परिवार में मां सुमन देवी और छोटा भाई सुनील कुमार है।
अंकित के भाई रघुवीर बताते हैं कि अंकित स्टडी वीजा पर 15 फरवरी 2025 को रूस गया था। परिवार ने कर्ज लेकर उसे वहां पढ़ने भेजा था। वहां उसने लेंग्वेज कोर्स में एडमिशन लिया था। पढ़ाई के साथ ही वह रेस्टोरेंट में काम करने लगा था। इसी तरह विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर गया। मगर मार्च 2025 में वापस आ गया।
इसके बाद बिजनेस वीजा पर जुलाई 2025 को वापस चला गया था। वह भी रेस्टोरेंट में काम कर रहा था। विजय को वहां एक रूसी महिला मिली थी, जिसने कंप्यूटर ऑपरेटर या सिक्योरिटी गार्ड लगवाने का झांसा देकर रशियन आर्मी में भर्ती करवा दिया। 20 अगस्त को उन्हें रूस से यूक्रेन में ले गए। जहां मात्र 10 दिन की ट्रेनिंग देकर बंकरों में भेज दिया।

अंकित के भाई रघुवीर जांगड़ा ने बताया कि अंकित से संपर्क नहीं हो रहा। मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। फेसबुक-इंस्टाग्राम पर भी कोई रिप्लाई नहीं है।
रोहतक के संदीप ने वीडियो भेज कहा था- मेरी जान को खतरा रोहतक के तैमूरपुर गांव का संदीप सितंबर 2024 में चरखी दादरी के एक एजेंट के माध्यम से रूस गया था। संदीप के पिता बख्शी राम का आरोप है कि एजेंट ने उन्हें लालच दिया था कि वहां वह पढ़ाई के साथ कुक का काम कर पाएगा। इससे उसे पैसे भी मिलेंगे और पढ़ाई का खर्चा भी निकल जाएगा, लेकिन वहां एजेंटों ने उसके हाथ में बंदूक थमा दी और 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद उसे सेना में भर्ती करा दिया।
संदीप के दोस्त मयंक ने बताया था कि उसके पास संदीप का वॉट्सऐप पर मैसेज आया था। संदीप ने उसे बताया कि कुक की नौकरी का वादा कर उसे सेना में भर्ती करा दिया गया है। अब उसे यूक्रेन के साथ युद्ध में भेज दिया गया है।
हाल ही में संदीप ने परिवार को वीडियो भेजकर कहा था कि उसकी जान को खतरा है। उसे दिन में एक बार खाना दिया जाता है और वे बंकर से बाहर नहीं निकल सकते।

रूस आर्मी की ड्रेस में संदीप का फोटो। उसने यह फोटो अपने परिवार को भेजी थी।
हिसार का अमन पिछले साल स्टडी वीजा पर गया हिसार के मदनहेड़ी गांव निवासी अमन भी रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसा हुआ है। उसके परिवार ने उसे सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है। अमन की मां सुमन का आरोप है कि वह 2024 में वैध स्टडी वीजा पर रूस गया था। वहां धोखे से एजेंटों ने उसे रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में धकेल दिया गया है, जिससे उनकी जान को खतरा है। अमन से संपर्क नहीं हो पा रहा है। सरकार से मांग है कि अमन को भारत लाया जाए।
अमन ने आखिरी बार वीडियो जारी कर कहा था कि वहां के हालात बहुत खराब हैं, कभी भी मौत हो सकती है। उसके सामने कई लोग मारे जा चुके हैं।

हिसार में मदनहेड़ी गांव के अमन ने वीडियो जारी कर अपनी जार को खतरा बताया था। – फाइल फोटो
अब कैथल और हिसार के 2 युवकों के बारे में जानिए जिनकी मौत हो चुकी…
परिवार के पास सोनू की मौत का लेटर आया हिसार के मदनहेड़ी गांव के सोनू की मौत हो चुकी है। वह मई 2024 में फॉरेन लैंग्वेज का कोर्स करने गया था। सोनू के भाई अनिल ने बताया था कि सोनू ने 3 सितंबर को आखिरी बार फोन कर बताया था कि उसे जबरन रशियन आर्मी में भर्ती किया जा रहा है और जल्द युद्ध में भेजा जाएगा। 6 अक्टूबर को भी परिवार के पास रूस की सेना के एक अधिकारी ने पत्र भेजकर जानकारी दी कि सोनू की युद्ध में मौत हो चुकी है।

रशियन आर्मी में भर्ती सोनू सबसे पीछे खड़ा होकर विक्ट्री साइन बनाता हुआ। – फाइल फोटो
कर्मचंद की 6 सितंबर को मौत हुई, 18 अक्टूबर भारत आया शव कैथल जिले के जनेदपुर गांव का कर्मचंद (22) जर्मनी जाना चाहता था। एजेंट ने यही भरोसा दिलाया था, लेकिन जर्मनी के बजाय रूस भेज दिया। जहां उसे सेना में भर्ती कर दिया गया। फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। युद्ध के दौरान 6 सितंबर को बम गिरने से कर्मचंद की मौत हो गई। करीब डेढ़ महीने बाद 17 अक्तूबर को उसका पार्थिव शरीर भारत लौटा और 18 अक्टूबर को गांव में अंतिम संस्कार किया गया।

विदेश जाने से पहले एयरपोर्ट पर अपने पिता व बहन के साथ कर्मचंद
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रूस-युक्रेन युद्ध में हरियाणा के एक और युवक की मौत हो गई है। इस बार हिसार के गांव मदनहेड़ी के 28 वर्षीय सोनू की मौत की पुष्टि हुई है। सोनू के बड़े भाई अनिल ने बताया कि सोनू को जबरन रशियन आर्मी में भर्ती कर युद्ध में भेजा गया था। पढ़ें पूरी खबर…




























