चंडीगढ़। पीजीआई में हॉस्टल की सुविधा लेने वाले डॉक्टरों को जल्द ही पहले से ज्यादा भुगतान करना होगा। पीजीआई की 12 अगस्त को हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (एसएफसी) ने हॉस्टल किराया, ओवरस्टे शुल्क, गेस्ट रूम शुल्क और हॉस्टल सिक्योरिटी मनी की संशोधित दरों को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ नई दरें लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। खास बात यह है कि हॉस्टल के मासिक किराये से लेकर सिक्योरिटी मनी तक कई शुल्क सीधे दोगुने किए गए हैं। संशोधित दरें केवल उन स्पॉन्सर्ड उम्मीदवारों पर लागू होंगी, जो हॉस्टल आवास की मुफ्त सुविधा के पात्र नहीं हैं।
नई दरें लागू होने के बाद बैचलर डॉक्टरों के लिए हॉस्टल रूम का किराया 500 से बढ़कर 1000 रुपये प्रति माह होगा। वहीं मैरिड डॉक्टरों को अब कमरे के लिए 1500 के बजाय 3000 रुपये प्रति माह देने होंगे। इससे पीजीआई में ट्रेनिंग, रिसर्च या अन्य कार्यों के लिए आने वाले और संस्थान से मुफ्त आवास के पात्र नहीं होने वाले डॉक्टरों पर सीधा आर्थिक असर पड़ेगा।
ओवरस्टे किया तो देना होगा 2000 तक रोजाना
एसएफसी ने हॉस्टल की तय अवधि के बाद कमरा खाली नहीं करने पर लगने वाले ओवरस्टे चार्ज में भी बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरों के अनुसार, बैचलर डॉक्टरों से पहले दो महीने तक 400 रुपये प्रतिदिन और इसके बाद कमरा खाली होने तक 1000 रुपये प्रतिदिन लिया जाएगा। पहले यह शुल्क क्रमश: 200 और 500 रुपये था। मैरिड डॉक्टरों के लिए पहले दो महीने का ओवरस्टे चार्ज 800 रुपये प्रतिदिन और इसके बाद 2000 रुपये प्रतिदिन होगा। पहले यह क्रमश: 400 और 1000 रुपये था।
गेस्ट रूम और सिक्योरिटी मनी भी दोगुनी
एसएफसी ने गेस्ट रूम के शुल्क में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरों के तहत नॉन-एसी गेस्ट रूम का चार्ज 100 से बढ़कर 200 रुपये प्रतिदिन और एसी गेस्ट रूम का शुल्क 200 से बढ़कर 400 रुपये प्रतिदिन होगा। वहीं हॉस्टल की रिफंडेबल सिक्योरिटी मनी 5000 से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी जाएगी।
डॉक्टरों की जेब पर पड़ेगा भारी
पीजीआई में देशभर से डॉक्टर ट्रेनिंग, रिसर्च और विभिन्न अकादमिक गतिविधियों के लिए आते हैं। खासकर जूनियर और स्पॉन्सर्ड डॉक्टरों के लिए हॉस्टल किफायती आवास का अहम विकल्प होता है। ऐसे में प्रस्तावित नई दरों से किराया और ओवरस्टे चार्ज बढ़ने का असर सीधे उनके रहने के बजट पर पड़ेगा।























