चंडीगढ़। बेल्जियम के ब्रसेल्स में हुई एक नीलामी में चंडीगढ़ का प्रसिद्ध हेरिटेज फर्नीचर 1.06 करोड़ रुपये में बेचा गया है। इनमें छह कुर्सियों का एक सेट 31.90 लाख रुपये में तो एक सोफा करीब 20 लाख रुपये में नीलाम हुआ है। लगातार हो रही नीलामी पर चंडीगढ़ हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने नाराजगी जताते हुए विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय को इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत सौंपी है।
जग्गा ने शिकायत में बताया कि 18 जून को ब्रसेल्स की एक नीलामी संस्था ”पीआइएएसए” की ओर से चंडीगढ़ की पांच धरोहर वस्तुओं की नीलामी की गई, जिसकी कुल कीमत 1.06 लाख यूरो जो कि भारतीय करेंसी के अनुसार करीब 1.06 करोड़ रुपये रही। इस नीलामी में छह कुर्सियों का सेट 32,000 यूरो (करीब 31.90 लाख रुपये), एक कुर्सी 12,000 यूरो (करीब 11.96 लाख रुपये), तीन कमेटी कुर्सियां 25,000 यूरो (लगभग 24.92 लाख), एक सोफा 20,000 यूरो (लगभग 19.94 लाख) और एक डाइनिंग टेबल 17,000 यूरो (लगभग 16.94 लाख) में नीलाम हुआ।
जग्गा ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि यह नीलामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत, विरासत भारत की सोच के खिलाफ है।
नीलामी के बारे में दूतावासों को जागरूक करें
जग्गा ने कहा है कि इससे पहले उनके प्रयासों के बाद संस्कृति मंत्रालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) जैसी एजेंसियों को निर्देशित किया गया था। लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की है कि भारतीय दूतावासों को इस बारे में जागरूक किया जाए ताकि वे विदेशों में हो रही नीलामियों की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई करें। जग्गा के अनुसार चंडीगढ़ की विरासत वस्तुएं अवैध रूप से देश से बाहर ले जाई गई हैं और अब उनकी नीलामी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हो रही है। इसे रोकने का एकमात्र तरीका कूटनीतिक हस्तक्षेप है। उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं कि वे इस तरह की नीलामी की जानकारी मिलने पर तत्काल हस्तक्षेप करें और वस्तुओं को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करें।