नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को भारत-चीन सीमा विवाद पर संसद को जानकारी दी। विदेश मंत्री ने सदन में कहा कि भारत और चीन बातचीत और कूटनीति के जरिए सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। LAC पर अभी भी कई इलाकों में विवाद है। भारत का मकसद ऐसा समाधान निकालना है, जो दोनों देशों को मंजूर हो।
जयशंकर ने कहा, ‘2020 के बाद से भारत और चीन के रिश्ते सामान्य नहीं हैं। उस समय चीन की कार्रवाई से सीमा क्षेत्र में शांति भंग हुई थी। तब से दोनों देशों के रिश्ते ठीक नहीं हैं। हालांकि हाल ही में हुई बातचीत से स्थिति में कुछ सुधार हुआ है।’
विदेश मंत्री बोले- 2 साल में 38 बैठकें हुईं भारत और चीन के बीच रिश्ते बेहतर करने के लिए मेरी चीनी विदेश मंत्री से बातचीत हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने समकक्ष चीनी नेता से बातचीत की। पूर्वी लद्दाख में पूरी तरह से डिसइंगेजमेंट हो चुका है।
शांति और स्थिरता की बहाली भारत-चीन रिश्तों का मुख्य आधार है। भारत-चीन संबंधों पर चर्चा के लिए राजनयिक स्तर पर वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कोऑपरेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और सैन्य स्तर पर सीनियर हाईएस्ट मिलिट्री कमांडर्स (SHMC) की बैठकें होती हैं।
जून 2020 से अब तक WMCC की 17 और SHMC की 21 बैठकें हुईं। तब जाकर 21 अक्टूबर 2024 को देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों पर समझौता हुआ। सितंबर 2022 से इन मुद्दों पर चर्चा चल रही थी, जब हॉट स्प्रिंग्स पर अंतिम समझौता हुआ था।
जयशंकर बोले- 45 साल बाद पहली बार सैनिकों की जान गई
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा में बताया कि जून 2020 की गलवान झड़प में 45 साल बाद पहली बार सैनिकों की जान गई और सीमा पर भारी हथियार तैनात हुए। भारत ने इस चुनौती का मजबूती से सामना किया और कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम करने की कोशिश की।
- ‘1988 से भारत-चीन ने सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने और शांति बनाए रखने के लिए कई समझौते किए। 1993, 1996, और 2005 में शांति और विश्वास बहाली के उपाय किए गए। लेकिन 2020 की घटना ने इन प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचाया और रिश्तों पर गहरा प्रभाव डाला।’
- ‘चीन ने 1962 के युद्ध में अक्साई चिन के 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके अलावा, 1963 में पाकिस्तान ने 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन चीन को सौंप दी थी।’
- ‘2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन ने सीमा के पास बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए, जिससे दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ा। यह स्थिति भारतीय सेना की गश्ती में रुकावट बनी। हालांकि, हमारी सेना ने इस चुनौती का मजबूती से सामना किया।’

भारत-चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में चार साल से सीमा विवाद को लेकर तनाव था। दो साल की लंबी बातचीत के बाद अक्टूबर में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ है। इसके बाद दोनों देशों की सेनाएं देपसांग और डेमचोक से पीछे हट गई हैं।
समझौते के मुताबिक दोनों सेनाएं अप्रैल 2020 से पहली की स्थिति में वापस लौटेंगी। साथ ही उन्हीं क्षेत्रों में गश्त करेंगी, जहां अप्रैल 2020 से पहले किया करती थीं। इसके अलावा कमांडर लेवल मीटिंग होती रहेगी
2020 में भारत-चीन के सैनिकों के बीच गलवान झड़प के बाद से देपसांग और डेमचोक में तनाव बना हुआ था। करीब 4 साल बाद 21 अक्टूबर को दोनों देशों के बीच नया पेट्रोलिंग समझौता हुआ। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया था कि इसका मकसद लद्दाख में गलवान जैसी झड़प रोकना और पहले जैसे हालात बनाना है।
2020 में गलवान में हुआ था चीन-भारत की सेना में टकराव

तस्वीर लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प की है। इसी के बाद दोनों देशों के बीच विवाद गहराया।
जिनेवा में विदेश मंत्री ने कहा था- चीन से विवाद का 75% हल निकला
विदेश मंत्री जयशंकर ने 12 सितंबर को स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में एक समिट के दौरान कहा था कि चीन के साथ विवाद का 75% हल निकल गया है। विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि सीमा पर बढ़ते सैन्यीकरण का मुद्दा अभी भी गंभीर है।
जयशंकर ने कहा कि 2020 में चीन और भारत के बीच गलवान में हुई झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित किया है। सीमा पर हिंसा होने के बाद कोई यह नहीं कह सकता कि बाकी रिश्ते इससे प्रभावित नहीं होंगे।
हालांकि, 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में उन्होंने 75% विवाद हल होने वाले अपने बयान को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘मैंने यह बात सिर्फ सैनिकों के पीछे हटने के संदर्भ में कही थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…





























