चंडीगढ़ पीजीआई के एंडोक्रेनोलॉजी विभाग के शोध ने टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए नई राह खोल दी है। शोध में पाया गया कि ओरल सेमैगलूटाइड दवा न केवल ब्लड शुगर कंट्रोल करती है बल्कि हड्डियों की मजबूती और घनत्व भी बढ़ाती है। अब तक यह माना जाता था कि वजन घटने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं लेकिन इस शोध ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है।
शोध में पाया गया कि पुरुष मरीजों में कुल और ट्रैबेक्युलर बोन डेंसिटी में अधिक सुधार हुआ जबकि महिलाओं में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल कैल्सिफाइड टिशू इंटरनेशनल में प्रकाशित हुआ है।
यह शोध डॉ. संजय कुमार भडाड़ा, डॉ. दुरैराज अरजुनन (एंडोक्रिनोलॉजी विभाग) और डॉ. अजय दुसेजा (हेपेटोलॉजी विभाग) के नेतृत्व में किया गया। इसमें 36 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें टाइप-2 डायबिटीज और मेटाबॉलिक लिवर डिजीज थी। मरीजों को 12 सप्ताह तक सेमैगलूटाइड की नियंत्रित खुराक (3 से बढ़ाकर 14 मिलीग्राम तक) दी गई।
ऐसे किया गया आकलन
हड्डियों की स्थिति जानने के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन परिधीय मात्रा आधारित कम्प्यूटेड टोमोग्राफी एचआरपीक्यूसीटी और डीएक्सा स्कैन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया गया। 52 सप्ताह के बाद मरीजों में बोन मिनरल डेंसिटी में सुधार, हड्डियों की सूक्ष्म संरचना (बोन माइक्रोआर्किटेक्चर) बेहतर पाई गई। डॉ. संजय भडाड़ा ने बताया कि सेमैगलूटाइड जैसी जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाएं न सिर्फ डायबिटीज नियंत्रण में उपयोगी हैं बल्कि हड्डियों को कमजोर होने से भी बचाती हैं। उन्होंने बताया कि दवा का असर लिवर, बोन टर्नओवर सूचकांक (पीआईएनपी, बी-सीटीएक्स) या फाइब्रोसिस पर नकारात्मक नहीं रहा।
शोध का अंतरराष्ट्रीय महत्व
पीजीआई का यह शोध विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक वजन घटाने वाली दवाओं को हड्डियों की कमजोरी बढ़ाने वाली समझा जाता था लेकिन यह शोध दिखाता है कि सेमैगलूटाइड इसके उलट प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा भविष्य में डायबिटीज और ऑस्टियोपोरोसिस दोनों के इलाज के लिए दोहरी लाभदायक चिकित्सा साबित हो सकती है।














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