पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के सत्ता में आने के बाद से लुधियाना जिला भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का केंद्र रहा है। पिछले करीब साढ़े चार वर्षों में विजिलेंस ब्यूरो ने जिले में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है।
इस दौरान रिश्वतखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। छोटे कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों तक पर शिकंजा कसा गया है।
विजिलेंस के आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2021 के बीच 103 एफआईआर दर्ज की गई थीं। वहीं, 2022 से 2025 के दौरान यह संख्या बढ़कर 396 हो गई। वर्ष 2024 में लुधियाना विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के 31 मामले दर्ज किए। इन मामलों में 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 17 गिरफ्तारियां सीधे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने पर हुईं। दस मामले मुख्यमंत्री की एंटी करप्शन हेल्पलाइन से मिली शिकायतों के बाद दर्ज किए गए।
रायकोट से आप विधायक हाकम सिंह ठेकेदार ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के सार्थक नतीजे सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार अपने काम का पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने रखेगी।
12 जून, 2025 को रायकोट एसडीएम कार्यालय के स्टेनो जतिंदर सिंह उर्फ नीटा नूरपुरा को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 24 लाख 6 हजार रुपये की रिश्वत की नकदी बरामद हुई थी। जांच के बाद तत्कालीन एसडीएम गुरबीर सिंह कोहली और यूथ अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखजीत सिंह बग्गी झोरडां को भी नामजद किया गया। एसडीएम कोहली को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक मिली। नीटा नूरपुरा और बग्गी झोरडां जमानत पर बाहर हैं।
अगस्त 2024 में महिला सेल की तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त निर्दोष कौर और उनके रीडर बेअंत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उन पर 30 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप था। जनवरी 2023 में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अशोक कुमार को 25 हजार रुपये लेते पकड़ा गया था। यह राशि विकास कार्य की अनुदान जारी करने के बदले ली जा रही थी। तत्कालीन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी नरिंदर सिंह धालीवाल पर भी निजी ट्रांसपोर्टरों से मासिक रिश्वत लेने का मामला दर्ज हुआ।
निगम में गबन का मामला हुआ दर्ज
नगर निगम में तीन करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन का मामला दर्ज हुआ। इसमें सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता राजिंदर सिंह, अधिशासी अभियंता रणबीर सिंह और उप नियंत्रक वित्त एवं लेखा पंकज गर्ग शामिल थे। रणबीर सिंह को गिरफ्तार भी किया गया। मई 2026 में 66 केवी बिजली उपकेंद्र मामले में करीब 10 करोड़ रुपये के सरकारी नुकसान का आरोप लगा। इस मामले में पूर्व पीएसपीसीएल अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक केडी चौधरी, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता संजीव प्रभाकर और निजी बिल्डर अमित गर्ग को गिरफ्तार किया गया।























