रामपुर का फेमस हब्शी हलवा शहर की पहचान बन चुका है। एकदम अलग स्वाद और खुशबू इस हलवा को चखने वालों को दीवाना बना देती है। रामपुर में आपको हब्शी हलवा की कई दुकानें मिल जाएंगी, लेकिन हकीमजी का हब्शी हलवा काफी ज्यादा फेमस है। कहा जाता है कि 1930 के आसपास रामपुर के नवाब हामिद अली खान एक बार अफ्रीका गए थे और वहां उन्हें ये हलवा बहुत पसंद आया था। नवाब साहब हलवा के स्वाद के इतने दीवाने हो गए कि हलवा बनाने वाले को ही अपने साथ ले आए। इसके बाद हकीमजी ने इस हलवा को बनाना सीखा और रामपुर में बेचने लगे। ये हलवा कई घंटों की मेहनत से बनाया जाता है। इसे बनाने में करीब 3-4 घंटे का समय लगता है। घंटों की मेहनत से तैयार इस हलवा को बनाते वक्त लगातार चलाते रहना पड़ता है।
रामपुर का हब्शी हलवा
पहले परंपरागत तरीके से इसे अंकुरित गेहूं को पीसकर तैयार किया जाता था। गेहूं का समनक बनाया जाता था। समनक बनाने के लिए गेहूं को पहले 24 घंटे के लिए पानी में भिगोते हैं। अब किसी मोटे और सूती कपड़े में भीगे हुए गेहूं पानी से निकालकर करीब 4 दिन के लिए अंकुरित होने के लिए रख दें। जब गेहूं अंकुरित हो जाएं तो उन्हें कपड़े से निकाल लें। अब इसे किसी कपड़े पर अच्छी तरह फैला दें और इसे 3-4 दिन अच्छी तरह धूप में सूखने दें। अब सूखने के बाद इसे मिक्सर ग्राइंडर में पीस लें। इसे सूजी जैसी फॉर्म में पीसना होता है न बहुत बारीक न मोटा। हालांकि अब इसे सूजी, दूध और घी से तैयार किया जाने लगा है। मुगल सर्दियों में ऊर्जा देने वाले भोजन में हब्शी हलवा को बहुत पसंद करते थे। इस हलवा में घी के साथ मेवा और कई गर्माहट देने वाले मसालों का भी उपयोग किया जाता है। अगर आप ये हलवा घर में बनाना चाहते हैं तो हम आपको हब्शी हलवा की आसान रेसिपी बता रहे हैं। इससे आप घर में भी हब्शी हलवा तैयार कर सकते हैं।
हब्शी हलवा की रेसिपी
रामपुर का हब्शी हलवा बनाने के लिए आपको गाढ़ा फुल क्रीम दूध लेना है। करीब 1.5 लीटर दूध लें और उसे कड़ाही में डालकर चलाते हुए पकाएं। अब दूध में आधा कप के करीब सूजी डाल दें और दूध में मिक्स करते हुए चलाएं। अब स्वादानुसार चीनी डाल दें और हलवा को पकाते रहें। बीच बीच में हलवा में घी डालते रहे हैं और चलाते रहें। जब हलवा को चलाते हुए हल्का लाल रंग आने लगे तो इसमें फिर से घी मिलाते रहें। अब हलवा को इतना पकाना है कि इसमें कैरेमलाइज कलर आने लगे। हलवा को लगातार चलाना है जिससे इसकी चिपक खत्म हो जाए। जब हलवा का रंग ब्राउन हो जाए तो बादाम मिला दें। इसे घी लगी किसी प्लेट में निकाल लें। अब हलवा को जमा दें और इसके ऊपर बादाम या पिस्ता डालकर गार्निश करें। हल्का ठंडा होने पर हलवा को काट लें और इसे खाएं।
इस हलवा की खासियत है कि इसकी भुनाई। इतनी ज्यादा देर तक भूनने की वजह से ये हलवा कई दिनों तक खराब नहीं होता है। इसका स्वाद भी गजब का आता है। आपको हब्शी हलवा भारत के दूसरे किसी भी शहर में खाने को नहीं मिलेगा।









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