सात साल बाद रविवार को पंजाब में जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव हैं। ग्रामीण अंचलों पर आधारित इस चुनाव में जीत के लिए सभी सियासी दलों ने खूब जोर लगाया। छोटे से लेकर बड़े नेताओं ने अपने-अपने प्रत्याशियों को जितवाने के लिए जमकर प्रचार किया। स्थिति देखें तो कई सीटों पर आप, शिअद और कांग्रेस के बीच तिकोना मुकाबला है तो कहीं आमने-सामने की टक्कर है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का मानना है कि जिला परिषद व पंचायत समिति की कई सीटों पर भाजपा, शिअद और कांग्रेस ने आप प्रत्याशियों के खिलाफ अंदरूनी समझौता कर लिया है। उनका कहना है कि इन सीटों पर आप प्रत्याशी के खिलाफ जो मुख्य प्रतिद्वंद्वी मैदान में हैं, उनके लिए तीनों दलों के नेता व कार्यकर्ता प्रचार कर रहे हैं। इनका मकसद सिर्फ आप प्रत्याशी को हराना है।
खैर, साल 2018 में हुए इन चुनावों की स्थिति देखें तो उस वक्त कांग्रेस को सत्ता में रहने बड़ा फायदा मिला था। जिला परिषद की अधिकतर सीटें कांग्रेस प्रत्याशियों ने ही जीती थीं। बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, लुधियाना, मानसा, रोपड़ व संगरूर में तो कांग्रेस ने पूरी तरह क्लीन स्वीप किया था। यहां किसी भी दल ने एक भी सीट नहीं जीती थी जबकि फिरोजपुर, मोगा, मोहाली व तरनतारन में शिरोमणि अकाली दल (शिअद), होशियारपुर व पठानकोट में भाजपा व जालंधर में आजाद प्रत्याशी ने 1-1 सीट पर जीत दर्ज की थी। अमृतसर व फाजिल्का में शिअद को 4-4 और श्री मुक्तसर साहिब व एसबीएस नगर में 2-2 सीटें मिलीं थी।


























