19 मिनट पहले
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यह वीडियो 19 दिसंबर को हूती संगठन ने जारी किया था। इसमें उसके लड़ाके जहाज को हाइजैक करते नजर आ रहे हैं।
यमन के ईरान समर्थक हूती विद्रोही लाल सागर और हिंद महासागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बना रहे हैं। हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सारी ने शनिवार (1 जून) को बताया कि एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियल, एक युद्धपोत समेत तीन और जहाजों को निशाना बनाकर छह ऑपरेशन चलाए गए।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, याह्या ने आगे बताया कि लाल सागर के उत्तर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर आइजनहावर पर हूती विद्रोहियों ने मिसाइल और ड्रोन से अटैक किया। उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट पर पिछले 24 घंटे में दो बार अटैक किया गया।
इसके अलावा लाल सागर में एक युद्धपोत और अबलियानी (ABLIANI ) जहाज को निशाना बनाया गया। साथ ही मैना (MAINA) नाम के एक और जहाज को भी लाल सागर और अरब सागर में दो बार निशाना बनाया गया।अबलियानी जहाज एक ऑयल टैंकर है और मैना जहाज में पैसेंजर के साथ सामान एक देश से दूसरे देश भेजा जाता है।

हूती विद्रोहियों अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाकर इजराइल पर दबाव बना रहे हैं।
हिंद महासागर में भी जहाजों को बनाया जा रहा है निशाना
हूती विद्रोही लगातार जहाजों को निशाना बनाकर इजराइल पर युद्ध को खत्म करने दबाव बना रहे हैं। हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सारी ने बताया कि उन्होंने हिंद महासागर में भी अलोराईक नाम के जहाज को निशाना बनाया है। साथ ही लाल सागर में मौजूद अल-मंदाब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी में भी मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया।
इन सब अटैक से बचने के लिए नवंबर से दुनियाभर के कॉमर्शियल जहाज लाल सागर के बदले अफ्रीका से होते हुए गुजर रहे हैं।

लाल सागर से दुनिया का 10% व्यापार किया जाता है और एशिया-यूरोप का 40%।
इजराइल को टारगेट करना चाहते हैं हूती विद्रोही
पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने लाल सागर और उसके आसपास 100 से ज्यादा हमले किए हैं। फरवरी में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक कार्गो शिप गैलेक्सी लीडर को हाईजैक कर लिया था। यह जहाज तुर्किये से भारत आ रहा था। हूती विद्रोहियों ने इसे इजराइली जहाज समझ कर हाईजैक किया था।
वारदात से पहले हूती समूह ने इजराइली जहाजों पर हमले की चेतावनी दी थी। हूती विद्रोहियों के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा था कि इजराइल की तरफ से चलने वाले सभी जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।
कौन हैं हूती विद्रोही
- साल 2014 में यमन में गृह युद्ध शुरू हुआ। इसकी जड़ शिया-सुन्नी विवाद है। कार्नेजी मिडिल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों समुदायों में हमेशा से विवाद था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत से गृह युद्ध में बदल गया। 2014 में शिया विद्रोहियों ने सुन्नी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
- इस सरकार का नेतृत्व राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी कर रहे थे। हादी ने अरब क्रांति के बाद लंबे समय से सत्ता पर काबिज पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से फरवरी 2012 में सत्ता छीनी थी। हादी देश में बदलाव के बीच स्थिरता लाने के लिए जूझ रहे थे। उसी समय सेना दो फाड़ हो गई और अलगाववादी हूती दक्षिण में लामबंद हो गए।
- अरब देशों में दबदबा बनाने की होड़ में ईरान और सऊदी अरब भी इस गृह युद्ध में कूद पड़े। एक तरफ हूती विद्रोहियों को शिया बहुल देश ईरान का समर्थन मिला। तो सरकार को सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब का।
- देखते ही देखते हूती के नाम से मशहूर विद्रोहियों ने देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 2015 में हालात ये हो गए थे कि विद्रोहियों ने पूरी सरकार को निर्वासन में जाने पर मजबूर कर दिया था।




















