44 मिनट पहले
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पाकिस्तान, चीन, ईरान और रूस ने अफगानिस्तान में किसी भी विदेशी एयरबेस की स्थापना का विरोध किया है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान इन चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें अफगानिस्तान की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करने की अपील की गई।
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अफगानिस्तान से बगराम एयरबेस को अमेरिका को लौटाने की मांग की है। जिसे 2001 में 9/11 हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने इस्तेमाल किया था।
ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर अफगानिस्तान ऐसा नहीं करता तो ‘बुरे नतीजे’ हो सकते हैं। उन्होंने कहा था कि बगराम एयरबेस रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह चीन की परमाणु हथियार सुविधाओं से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में बगराम को छोड़ने के फैसले को एक असफलता बताया था।
हालांकि, अफगान अधिकारियों ने साफ कहा था कि वे किसी भी तरह की अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के पक्ष में नहीं हैं।
अफगान विदेश मंत्रालय के अधिकारी जाकिर जलाल ने कहा, ‘अफगानिस्तान और अमेरिका को बातचीत करनी चाहिए, लेकिन अफगान जमीन पर अमेरिकी सैन्य उपस्थिति स्वीकार्य नहीं है।’
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संयुक्त राष्ट्र ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए, विदेशी संपत्तियां फ्रीज होंगी; हथियारों की खरीद-बिक्री पर भी रोक

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने रविवार को ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ये कदम उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर उठाया गया है। प्रतिबंध रविवार रात 12 बजे से लागू हो गए।
अब ईरान की विदेशी संपत्तियां फ्रीज होंगी। हथियारों की खरीद-बिक्री पर रोक लगेगी। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों पर भी सख्ती होगी।
ये कार्रवाई स्नैपबैक मैकेनिज्म के तहत हुई है, जिसे 2015 के परमाणु समझौते में शामिल किया गया था। ईरान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसे प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है और इनका उस पर असर नहीं होगा।
इससे पहले जून में इजराइल ने ईरान पर 12 दिन तक हमला किया था। इस दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी।
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