What Is Bcci Central Contract:क्या कोहली-रोहित की सैलरी से कटेंगे 2-2 करोड़, कैसे तय होता है खिलाड़ी का वेतन? – Bcci Central Contracts Explained: Why Virat Kohli And Rohit Sharma May Face ₹2 Crore Pay Cuts
भारतीय क्रिकेट में अगले चक्र के बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट यानी केंद्रीय अनुबंध को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अप्रैल 2025 में जारी हुए पिछले कॉन्ट्रैक्ट के बाद अब नए चक्र से पहले यह खबर तेजी से फैल रही है कि टीम इंडिया के दो दिग्गज, विराट कोहली और रोहित शर्मा को अगले सत्र में वेतन कटौती का सामना करना पड़ सकता है। कोहली और रोहित सिर्फ एक प्रारूप, वनडे में टीम का हिस्सा हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड इसे देखते हुए, एक ग्रेड कम करने पर विचार कर रहा है।
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भारतीय टीम
– फोटो : ANI
ये कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ खिलाड़ियों को एक साल का वेतन देने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह बीसीसीआई का एक सुव्यवस्थित मॉडल है जिसके जरिए प्रदर्शन, निरंतरता, क्रिकेट के अलग-अलग प्रारूपों में योगदान और चयनकर्ताओं के मूल्यांकन के आधार पर खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में बीसीसीआई ने कई चौंकाने वाले फैसले भी लिए, जिसकी कभी सराहना हुई तो कभी आलोचना झेलनी पड़ी। केंद्रीय अनुबंध में जगह बनाने के लिए बीसीसीआई ने पिछले चक्र में कुछ बदलाव भी किए थे। आइए इसके बारे में जानते हैं…
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भारतीय टीम
– फोटो : BCCI
बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट कैसे काम करता है?
बीसीसीआई हर साल खिलाड़ियों को चार ग्रेड में बांटता है- ए+ (A+), ए (A), बी (B), और सी (C)। हर ग्रेड के साथ एक तय सालाना वेतन जुड़ा होता है, जिसे रिटेनर फीस कहा जाता है। सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाली राशि मैच फीस से अलग होती है, यानी खिलाड़ी चाहे जितने मैच खेलें, यह वार्षिक रिटेनर तय रहता है।
ए+ ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना सात करोड़ रुपये सैलरी मिलती है। इसमें गिने चुने और नामी क्रिकेटर होते हैं।
ए ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना पांच करोड़ रुपये सैलरी मिलती। इसमें भी अहम खिलाड़ियों को जगह दी जाती है।
बी ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना तीन करोड़ रुपये सैलरी मिलती है। इसमें ज्यादातर वो खिलाड़ी होते हैं, जो एक या दो फॉर्मेट में खेल रहे हों, लेकिन कोर टीम का हिस्सा हैं।
सी ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना एक करोड़ रुपये सैलरी मिलती है। इसमें वो खिलाड़ी होते हैं, जिनकी टीम में जगह हमेशा पक्की न हो या फिर जिन्हें ज्यादा मैचों का अनुभव न हो। या फिर किसी एक फॉर्मेट में तय मैच खेल चुके हों। इसमें खिलाड़ियों की एंट्री होती रहती है।
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भारतीय टीम ने बिना ट्रॉफी के जश्न मनाया
– फोटो : BCCI
आइए अब जानते हैं कि क्रिकेटरों के ग्रेड कैसे तय होते हैं…
1. फॉर्मेट प्राथमिकता और टेस्ट क्रिकेट का महत्व
बीसीसीआई की नीति में टेस्ट क्रिकेट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में खेलते हैं, या फिर टेस्ट में बड़ा योगदान देते हैं, उन्हें ए+ ग्रेड मिलता है। इसी आधार पर उम्मीद है कि भारत के टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल को आने वाले चक्र में ए+ श्रेणी में शामिल किया जा सकता है।
2. प्रदर्शन और निरंतरता सबसे अहम
खिलाड़ियों का ग्रेड उनके पिछले कॉन्ट्रैक्ट साइकिल के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर प्रमोशन दिया जाता है। वहीं, फॉर्म, फिटनेस या भागीदारी में गिरावट पर डिमोशन दिया जाता है।इसी वजह से कोहली और रोहित की स्थिति पर चर्चा शुरू हुई है।
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– फोटो : PTI
3. न्यूनतम मैच खेलने का नियम
किसी भी खिलाड़ी को ग्रेड सी के लिए पात्र बनने के लिए न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने होते हैं। जैसे किसी एक खिलाड़ी को सी ग्रेड में शामिल होने के लिए तीन टेस्ट, आठ वनडे या 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलना जरूरी है। सिर्फ ज्यादा मैच खेलने से उच्च ग्रेड नहीं मिलता, फॉर्मेट की प्राथमिकता और प्रदर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण है।
4. घरेलू क्रिकेट में उपस्थिति अनिवार्य
हाल के वर्षों में बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि जो खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए नहीं खेल रहे हैं, उन्हें घरेलू क्रिकेट, खासकर रणजी ट्रॉफी खेलना होगा। इस नियम का पालन न करने पर कई खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट से बाहर भी किया गया है। श्रेयस अय्यर और ईशान किशन इसका सटीक उदाहरण हैं।