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देहरादून33 मिनट पहले
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उत्तरकाशी में 12 नवंबर को सुबह 4 बजे सिल्क्यारा टनल का एक हिस्सा धंस गया। साढ़े 4 किलोमीटर लंबी यह टनल यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर सिल्क्यारा और डंडलगांव के बीच बनाई जा रही है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 12 नवंबर की सुबह 4 बजे एक निर्माणाधीन टनल धंस गई थी। पिछले 90 घंटे से 40 मजदूर अंदर फंसे हुए हैं। चारधाम प्रोजेक्ट के तहत यह टनल ब्रह्मखाल और यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर सिल्क्यारा और डंडलगांव के बीच बनाई जा रही है।
फंसे हुए मजदूर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हैं। नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL), NDRF, SDRF, ITBP, BRO और नेशनल हाईवे की 200 से ज्यादा लोगों की टीम 24 घंटे काम कर रहे हैं।
रेस्क्यू टीम ने 14 नवंबर को स्टील पाइप के जरिए मजदूरों को निकालने की प्रोसेस शुरू की। इसके लिए ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रोलिक जैक की मदद से 35 इंच के डायमीटर का स्टील पाइप टनल के अंदर डालने की कोशिश की गई। हालांकि, इसमें सफलता नहीं मिली।
रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे PMO ने इसके बाद सेना को इसमें शामिल किया। अब सेना अपनी हैवी मशीन से ड्रिलिंग का काम करेगी। सेना का मालवाहक विमान हरक्यूलिस बुधवार को मशीन लेकर चिन्यालीसौर हैलिपेड पहुंचा। यहां से मशीन सिलक्यारा लाई जा चुकी है।
इंजीनियर और ड्रिलिंग एक्सपर्ट आदेश जैन ने बताया- 14 नवंबर तक 6 बार मलबा धसक चुका है और इसका दायरा 70 मीटर तक बढ़ चुका है। पहले जो ड्रिलिंग मशीन लगी थी, केवल 45 मीटर तक ही काम कर सकती है, इसलिए बड़ी मशीन लाई गई है। टनल में फंसे सभी लोग 101% सुरक्षित हैं। मेरा मानना है कल शाम या रात तक सभी को सुरंग से सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।
इस बीच, अफसरों ने थाईलैंड की उसी कंपनी से सलाह मांगी है, जिसने 2018 में वहां गुफा में फंसे जूनियर फुटबॉल टीम के 12 बच्चों को 2 हफ्ते चले रेस्क्यू के बाद सुरक्षित निकाला था। यही नहीं, नॉर्वेजियन जियोटेक्नीकल इंस्टीट्यूट के सॉइल-रॉक एक्सपर्ट्स से भी मदद मांगी गई है।
ग्राफिक से समझें टनल से कैसे बाहर आएंगे मजदूर…

जिस स्टील के पाइप के जरिए मजदूरों को निकाला जाएगा, उसकी लंबाई के बारे में कोई जानकारी नहीं आई है। टनल के 60 मीटर के हिस्से में मलबा गिरा है, जो अब बढ़कर 70 मीटर हो गया है।
हैवी ड्रिलिंग मशीन उत्तराखंड पहुंची
उत्तराखंड DGP अशोक कुमार ने बताया, रेस्क्यू के लिए हैवी ड्रिलिंग मशीन चिन्यालीसौड़ हेलीपैड से सिल्क्यारा सुरंग पहुंच गई हैं। इसे इंस्टॉल करने के लिए बेस तैयार कर लिया गया है। जल्द ही असेंबल करके ड्रिलिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। अंदर फंसे मजूदरों को पाइप के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा पीने वाले पाइप में प्रेशर के जरिए चना और मुरमुरा मजदूरों तक पहुंचाया जा रहा है।
रेस्क्यू में देरी से नाराज मजदूरों की पुलिस से झड़प
इधर, बुधवार सुबह टनल के बाहर कुछ मजदूरों की पुलिस से झड़प हो गई। ये रेस्क्यू ऑपरेशन में हो रही देरी से नाराज हैं। इनकी मांग थी कि प्रशासन हमें टनल के अंदर जाने दे, हम फंसे हुए अपने साथियों को निकाल लाएंगे।
ग्राफिक के जरिए जानिए कहां हुआ हादसा…

फंसे हुए मजदूरों में सबसे ज्यादा झारखंड के
स्टेट डिजाजस्टर मैनेजमेंट के मुताबिक, टनल के अंदर झारखंड के 15, उत्तर प्रदेश के 8, ओडिशा के 5, बिहार के 4, पश्चिम बंगाल के 3, उत्तराखंड के 2, असम के 2 और हिमाचल प्रदेश का एक मजदूर शामिल है। बचाव कार्य देखने पहुंचे CM पुष्कर सिंह धामी ने बताया- सभी मजदूर सुरक्षित हैं, उनसे वॉकी-टॉकी के जरिए संपर्क किया गया है। खाना-पानी पहुंचाया जा रहा है।
फंसे हुए मजदूरों में से एक गब्बर सिंह नेगी के बेटे को मंगलवार को अपने पिता से कुछ सेकेंड के लिए बात करने की अनुमति दी गई। आकाश सिंह नेगी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया- मेरे पिता सुरक्षित हैं। उन्होंने हमसे चिंता नहीं करने को कहा।
प्लास्टर नहीं होने की वजह से टनल का 60 मीटर हिस्सा धंसा
NDRF के असिस्टेंट कमांडर करमवीर सिंह ने बताया- साढ़े 4 किलोमीटर लंबी और 14 मीटर चौड़ी इस टनल के स्टार्टिंग पॉइंट से 200 मीटर तक प्लास्टर किया गया था। उससे आगे कोई प्लास्टर नहीं था, जिसकी वजह से ये हादसा हुआ।
घटना की जांच के लिए कमेटी बनाई गई
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर हाईलेवल मीटिंग की। धामी ने बताया- हम रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्रालय की ओर से भी घटना की मॉनिटरिंग की जा रही है। उत्तराखंड सरकार ने घटना की जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी ने आज जांच शुरू भी कर दी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें…

यह टनल का शुरुआती हिस्सा है। अधिकारियों के मुताबिक यहां से 200 मीटर अंदर टनल धंसी।

14 नवंबर को ड्रिल मशीन मंगाई गई थी। DGP ने कहा- बुधवार को एयरफोर्स की मदद से हैवी ड्रिलिंग मशीन लाई जाएगी।

ऑगर ड्रिलिंग मशीन के जरिए मलबे के अंदर स्टील पाइप डाला जाएगा। जिसके रास्ते मजदूर बाहर आएंगे।

बुधवार को हैवी ड्रिलिंग मशीन उत्तराखंड के चिन्यालीसौड़ हेलीपैड पर पहुंची।

रेस्क्यू टीम के सामने दिख रहे इस मलबे को हटाने का प्रयास जारी है। इसके पीछे मजदूर फंसे हैं।

टनल के अंदर मशीनों की मदद से पिछले तीन दिन से लगातार रेस्क्यू का काम चल रहा है।

यह टनल के अंदर की तस्वीर हैं। एक तरफ का हिस्सा पूरी तरह से ब्लॉक हो गया।
चारधाम प्रोजेक्ट का हिस्सा है यह टनल
यह टनल चार धाम रोड प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा रहा है। 853.79 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह टनल हर मौसम में खुली रहेगी। यानी बर्फबारी के दौरान भी इसमें से लोग आना-जाना कर सकेंगे। इसके बनने के बाद उत्तरकाशी से यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी 26 किमी तक कम हो जाएगी।
दरअसल, सर्दियों में बर्फबारी के दौरान राड़ी टाप क्षेत्र में यमुनोत्री हाईवे बंद हो जाता है। जिससे यमुना घाटी के तीन तहसील मुख्यालयों बड़कोट, पुरोला और मोरी का जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से संपर्क कट जाता है। चारधाम यात्रा को सुगम बनाने और राड़ी टाप में बर्फबारी की समस्या से निजात पाने के लिए यहां ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत डबल लेन सुरंग बनाने की योजना बनी।


ग्राफिक : पुनीत श्रीवास्तव
इलस्ट्रेशन : गौतम चक्रवर्ती

















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