12 मिनट पहले
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अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ट्रम्प के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि ट्रम्प के राष्ट्रपति रहते हुए लिए गए कई फैसलों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है। ट्रम्प पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिका का राष्ट्रपति रहते हुए नवंबर 2020 के चुनाव के नतीजों को पलटने की साजिश रची थी।
इसे लेकर कोर्ट में उन पर केस चल रहा था। इसके खिलाफ ट्रम्प ने वॉशिंगटन की निचली अदालत में अपील की थी कि उन पर आपराधिक मामले न चलाए जाएं, पूर्व राष्ट्रपति होने के नाते उन्हें छूट मिले। इस अपील को लोअर कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने वॉशिंगटन की निचली कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। अमेरिका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति के पावर में रहते हुए किए कामों पर आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता है।
चुनावी फैसला पलटने का मामला 3 पॉइंट्स में समझें …
1. अमेरिका में 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल यानी कि अमेरिकी संसद में ट्रम्प के समर्थकों ने हिंसा की थी। 3 नवंबर 2020 को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग में बाइडेन को 306 और ट्रम्प को 232 इलेक्टोरल वोट मिले। नतीजे सामने आते ही ट्रम्प और उनके समर्थकों ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए।
2. वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने में जुटी तो ट्रम्प के समर्थक संसद में घुस गए। वहां तोड़फोड़ और हिंसा की। इसमें एक पुलिस अफसर समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा के बाद ट्रम्प पर अपने समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था।
3. 18 महीने तक मामले की जांच चली। पिछले साल दिसंबर में जांच कमेटी ने एक 845 पेज की रिपोर्ट तैयार की। इसमें ट्रम्प को दोषी ठहराया गया। उनके खिलाफ क्रिमिनल केस चलाने की सिफारिश की गई। इसके लिए 1000 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 940 से ज्यादा लोगों पर भी आरोप लगाए गए। इनमें से 500 लोग अब तक अपना जुर्म कबूल कर चुके हैं।






























