तेल अवीव4 घंटे पहले
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इजराइल के सोरोका मेडिकल सेंटर ने सैनिकों के लिए स्पेशल बैटल गियर बनाए हैं। इन्हें बैटल ग्लासेज भी शामिल हैं।
इजराइल और हमास के बीच जारी जंग में इजराइली डिफेंस फोर्सेस (IDF) के कई सैनिक आंखें गंवा चुके हैं। इसके अलावा कुछ सैनिकों को गंभीर चोटें हैं। कुछ की सर्जरी की गई है। यरूशलम पोस्ट ने यह जानकारी दी है।
दूसरी अहम खबर जंग के बाद गाजा में शासन के हवाले से से है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि जंग खत्म होने के बाद फिलिस्तीन अथॉरिटी ऑर्गनाइजेशन (PLO) उन्हें मंजूर नहीं है।
आंखें खराब होने की वजह क्या
- इजराइली मीडिया हाउस केएएन के मुताबिक- गाजा में जंग लड़ने वाले कई इजराइली सैनिकों की आंखों में गंभीर जख्म पाए गए हैं। इनकी सही संख्या तो नहीं बताई गई, लेकिन ये जरूर कहा गया कि एक महीने में करीब 40 इजराइली सैनिक आंख में चोट का शिकार हुए।
- इस रिपोर्ट के मुताबिक- इनमें से 15% सैनिक ऐसे हैं, जिन्हें एक या फिर दोनों आंखों की रोशनी गंवानी पड़ सकती है। कुछ के साथ तो यह हो भी चुका है। इसकी वजह यह बताई गई कि जंग के शुरुआती दौर में इजराइली सैनिकों ने प्रोटेक्टिव गियर खासतौर पर स्पेशल बैटल ग्लासेज का इस्तेमाल नहीं किया।
- कुछ सैनिकों की आंखों में छर्रे लगे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने फायरिंग के दौरान ग्लासेज नहीं पहने और गन से गोली निकलने के बाद जो जहरीला धुआं या कुछ बारूद होता है, वो उनकी आंखों में चला गया।
- इजराइल के सोरोका मेडिकल सेंटर ने सैनिकों के लिए स्पेशल बैटल गियर बनाए हैं। पिछले महीने इजराइली सरकार ने इसी तरह की रिपोर्ट्स पर रिएक्शन दिया था। उसने कहा था- हमारे सैनिकों के पास किसी प्रोटेक्टिव गियर की कमी नहीं है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि जंग के बाद गाजा की कमान फिलिस्तीन अथॉरिटी को देना मसले का हल नहीं है। (फाइल)
फिलिस्तीनी प्रधानमंत्री से नाखुश नेतन्याहू
- इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि जंग के बाद गाजा की कमान फिलिस्तीन अथॉरिटी को देना मसले का हल नहीं है। नेतन्याहू का यह बयान अहम है। दरअसल, शुक्रवार को फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री मोहम्मद सातायेह ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कहा था कि जंग के बाद वो गाजा का शासन संभालने के लिए तैयार हैं और इसमें हमास को भी साथ लिया जा सकता है।
- सातायेह ने माना था कि बैकडोर डिप्लोमैसी के तहत गाजा में जंग के बाद के हालात को लेकर उनकी अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने ये भी माना कि जंग के बाद की सरकार में हमास को सख्त शर्तों के साथ जगह दी जा सकती है।
- नेतन्याहू ने इस मसले पर दो टूक जवाब दिया। कहा- वो किस हमास की बात कर रहे हैं। जंग के बाद कोई हमास नहीं बचेगा। मैं ये भी साफ कर देना चाहता हूं कि फिलिस्तीन अथॉरिटी भी इस मसले का हल नहीं है।

इजराइली सेना ने शुक्रवार रात एक बयान में कहा कि गाजा में हमास के आतंकी अब आम लोगों के बीच छिपकर हमले कर रहे हैं। इससे फिलिस्तीनियों को ही खतरा है।
हमास के सामने सख्त शर्तें रहेंगी
- न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के मुताबिक- अमेरिका और फिलिस्तीन अथॉरिटी के बीच जंग के बाद गाजा के शासन से जुड़े मुद्दे पर बातचीत जारी है। फिलिस्तीन अथॉरिटी के प्रधानमंत्री मोहम्मद सातायेह ने खुद इसका खुलासा किया है।
- इस बातचीत का सबसे अहम पहलू ये है कि किसी वक्त फिलिस्तीन अथॉरिटी का हिस्सा रहे आतंकी संगठन हमास को भी प्लान से अलग नहीं रखा गया है। हालांकि, इसके लिए उसे तमाम शर्तें माननी होंगी।
- रिपोर्ट के मुताबिक- गाजा में जंग खत्म होने के बाद हमास को वहां के सिस्टम से पूरी तरह बाहर नहीं किया जाएगा। दरअसल, हमास को फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) का जूनियर पार्टनर बनाने की तैयारी है।
- तैयारी यह है कि गाजा को इंडिपेंडेंट स्टेट बनाया जाए। इसमें वेस्ट बैंक, गाजा, पूर्वी यरूशलम और रामल्लाह शामिल हों। फिलिस्तीन अथॉरिटी के प्रधानमंत्री सातायेह ने मीडिया हाउस ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में खुद यह माना है।
- हमास को इस प्लान से बाहर न रखने के पीछे सोच यह है कि जंग के बाद कम या ज्यादा ही सही हमास का प्रभाव गाजा में रहेगा ही। लिहाजा, उसे पूरी तरह किसी सिस्टम या प्लान से बाहर किया जाना परेशानियां पैदा कर सकता है।





















