UK के चैरिटी आयोग द्वारा ये फैसला लिया गया है। (फाइल शॉट)
ब्रिटेन के चैरिटी आयोग (Charity Commission) ने स्पष्ट किया है कि गुरुद्वारों में खालिस्तान शब्द वाले बोर्ड या बोर्ड रखना देश के चैरिटी नियमों के खिलाफ नहीं है। यह फैसला स्लौ स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे के मामले की विस्तृत जांच के बाद आया है।
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यह मामला 2019 में तब उठा था जब एक भारतीय पत्रकार ने गुरुद्वारे के अंदर लगे बड़े खालिस्तान बोर्ड की शिकायत आयोग से की थी। चैरिटी आयोग (ब्रिटेन में धार्मिक स्थलों की निगरानी करता है) ने इस पर जांच शुरू की थी। आयोग के अनुसार किसी राजनीतिक दल या राज्य का प्रचार करना उनके दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
दिसंबर 2024 में आयोग ने ट्रस्टियों को 10 मार्च 2025 तक बोर्ड हटाने का अल्टीमेटम दिया था, जो लागू नहीं किया गया। इसके बाद सिख फेडरेशन यूके और तीन सिख सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी, प्रीत कौर गिल और जस अठवाल ने मामले को सुलझाने के लिए आयोग से मुलाकात की।

यूके की चैरिटी आयोग द्वारा ये फैसला लिया गया है।
पढ़ें चैरिटी आयोग ने क्या कहा
आयोग ने बताया कि खालिस्तान शब्द का धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। जब तक गुरुद्वारे में लगे बोर्ड किसी राजनीतिक उद्देश्य का प्रचार नहीं कर रहे, तब तक यह चैरिटी कानून का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
फेडरेशन के राजनीतिक प्रमुख दाबिंदरजीत सिंह ने कहा कि खालिस्तान शब्द का मतलब पवित्र भूमि है। जो खालिस्तान जिंदाबाद से अलग है। स्लौ गुरुद्वारे के मामले में आयोग के फैसले के बाद अन्य गुरुद्वारे भी यह शब्द प्रदर्शित कर सकते हैं। बर्मिंघम, डर्बी, लीसेस्टर और लंदन के कई गुरुद्वारों में पहले से ही खालिस्तान शब्द मौजूद है।
चैरिटी आयोग के अनुसार जब तक धार्मिक स्थल अपने उद्देश्य की सीमा में रहते हैं और किसी राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा नहीं देते। वे खालिस्तान जैसे शब्द का उपयोग कर सकते हैं। ब्रिटेन में गुरुद्वारे सार्वजनिक हित में रजिस्टर्ड चैरिटी हैं, और उनका उद्देश्य धार्मिक शिक्षा और सेवा है।












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