लंदन14 मिनट पहले
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ब्रिटेन में 650 सीटों पर चुनाव हुए। किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कम से कम 326 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। (फाइल)
ब्रिटेन में गुरुवार (4 जुलाई) को आम चुनाव के लिए वोटिंग हुई। यहां शुक्रवार सुबह देशभर में लगभग 40 हजार पोलिंग सेंटर्स पर काउंटिंग शुरू हो गई है। कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी ने 2 सीट पर जीत भी दर्ज कर ली है।
वोटिंग खत्म होने के बाद देर रात करीब 3 बजे एग्जिट पोल के नतीजे घोषित हुए। इसमें भारतवंशी सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार का अनुमान लगाया गया है।
BBC पर पब्लिश पोल के रिजल्ट में लेबर पार्टी को 650 में से 410 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी को 131 सीटें मिल सकती हैं।
ब्रिटेन में गुरुवार को बैलेट पेपर से वोटिंग हुई। किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कम से कम 326 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी।
एग्जिट पोल में किसको कितनी सीटें?
- लेबर पार्टी: 410 सीटें
- कंजर्वेटिव पार्टी: 131 सीटें
- लिबरल डेमोक्रेट्स: 61 सीटें
- रिफॉर्म यूके: 13 सीटें
- स्कॉटिश नेशनल पार्टी: 10 सीटें
- ग्रीन पार्टी: 2 सीटें
- अन्य: 23 सीटें
कंजर्वेटिव पार्टी 14 साल से सत्ता में
PM ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी बीते 14 सालों से सत्ता में रही। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में लगातार उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई थी। कंजर्वेटिव पार्टी ने पिछले 5 सालों में 4 बार प्रधानमंत्री बदला है।
न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव परिणाम से पहले गुरुवार को लंदन के शेयर बाजार और पाउंड में डॉलर के मुकाबले बढ़त दर्ज की गई। इसकी वजह कंजर्वेटिव पार्टी की हार का अनुमान बताया जा रहा है।
इस बार ब्रिटेन में राजनीतिक दलों ने सबसे अधिक भारतवंशी उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इस बार कुल 107 ब्रिटिश इंडियन कैंडिडेट्स को टिकट मिला। लेबर पार्टी ने सबसे अधिक 33 उम्मीदवारों को टिकट दिया। वही, कंजर्वेटिव पार्टी ने कुल 30 उम्मीदवारों को टिकट दिया।

2019 में 67.3% वोटिंग हुई थी। तब सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी को 365, कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी को 202 और लिबरल डेमोक्रेट्स को 11 सीटें मिली थीं। इस बार लगभग सभी सर्वे में कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार की आशंका जताई गई थी। यूगोव के सर्वे में लेबर पार्टी को 425, कंजर्वेटिव को 108, लिबरल डेमोक्रेट को 67, SNP को 20 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
सुनक के राज में अमीर-गरीब के बीच फासला बढ़ा
ब्रिटेन की राजनीति में अब तक के सबसे युवा और भारतीय मूल के पहले प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की लोकप्रियता कम होने की सबसे बड़ी वजह वहां की अर्थव्यवस्था रही है। दरअसल, अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में सुनक इकोनॉमी को पटरी पर लाने में नाकाम रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अमीरों और गरीबों के बीच का फासला लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसकी वजह से लोगों के जीवन जीने के स्तर में गिरावट आई है। 6.70 करोड़ की आबादी वाले ब्रिटेन में प्रति व्यक्ति आय 38.5 लाख रुपए है। यहां महंगाई दर 2% है, तो वहीं खाद्य महंगाई दर 1.7% है। ब्रिटेन के 70 साल के इतिहास में टैक्स दरें सबसे ज्यादा हैं। सरकार के पास जनता पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं। इसकी वजह से पब्लिक सर्विस सिस्टम ठप होता जा रहा है।



भारत की तरह ही है ब्रिटेन का पॉलिटिकल सिस्टम
ब्रिटेन का राजनीतिक ढांचा काफी हद तक भारत से मिलता-जुलता है। यहां भी संसद के 2 सदन हैं। इन्हें हाउस ऑफ कॉमन्स और हॉउस ऑफ लॉर्ड्स कहा जाता है। ब्रिटेन के नागरिक आम चुनाव में हाउस ऑफ कॉमन्स (लोअर हाउस) के लिए सांसदों का चुनाव करते हैं। जिस पार्टी को 50% से ज्यादा सीटें मिलती है, वह सरकार बनाती है। पार्टी के लीडर को देश का प्रधानमंत्री घोषित किया जाता है।
ब्रिटेन की संसद में कुल 650 सीटें हैं। चुनाव जीतने के लिए पार्टियों को 326 का आंकड़ा पार करना होगा। अगर किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो वे बाकी छोटे दलों के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बना सकते हैं।
वहीं हाउस ऑफ लॉर्ड्स (अपर हाउस) के सदस्यों का चुनाव नहीं होता, इन्हें प्रधानमंत्री की सिफारिश पर नियुक्त किया जाता है। इसके सदस्यों की संख्या भी तय नहीं होती है। 20 जून 2024 तक ब्रिटेन के अपर हाउस में 784 सदस्य थे।
ब्रिटेन में भारत की तरह वोटिंग से पहले बड़ी-बड़ी रैलियां नहीं होतीं। प्रत्याशी घर-घर जाकर कैंपेन चलाते हैं। इस दौरान वे मतदाता से सीधे उनकी समस्याओं और चुनावी मुद्दों पर बात करते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार न्यूज चैनल्स को दिए इंटरव्यूज में अपना पक्ष रखते हैं। साथ ही वे वोटरों को साधने के लिए मंदिर भी जाते हैं और कई ईवेंट्स भी ऑर्गेनाइज करवाते हैं।

























