चेन्नई44 मिनट पहले
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तमिलनाडु की प्रति व्यक्ति आय ₹3.61 लाख रही, जिससे IVF बड़ी आबादी की पहुंच में आ सके।
तमिलनाडु देश में सबसे ज्यादा इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सेंटर वाला राज्य बन चुका है।
नेशनल असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी रजिस्ट्री के विश्लेषण के मुताबिक 6 जनवरी 2025 तक तमिलनाडु में रजिस्टर्ड IVF क्लिनिक की संख्या 669 है।
तमिलनाडु की कुल प्रजनन दर 1.3 है, जबकि गुजरात की प्रजनन दर भी इसी के आसपास 1.4 से 1.5 के बीच मानी जाती है। यहां तमिलनाडु के मुकाबले करीब आधे रजिस्टर्ड IVF सेंटर हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक IVF की मांग बच्चों की संख्या से नहीं बल्कि शादी और पहले बच्चे के समय से तय होती है।
तमिलनाडु में महिलाओं की ऊंची शिक्षा, औपचारिक रोजगार और शहरी जीवनशैली के कारण विवाह और मातृत्व देर से होता है।
इससे उनकी बायलॉजिकल फर्टिलिटी घटती है, लेकिन संतान की इच्छा बनी रहती है। इसलिए IVF की मांग बढ़ रही है।

गुजरात में IVF की जरूरत सीमित
गुजरात में परंपरागत पारिवारिक ढांचा और कम उम्र में विवाह अब भी आम है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना अधिक रहती है और IVF की जरूरत सीमित रहती है। आय भी बड़ा कारण है। तमिलनाडु की प्रति व्यक्ति आय ₹3.61 लाख रही, जिससे IVF बड़ी आबादी की पहुंच में आ सके।
मध्य प्रदेश: 40% कपल IVF से बन रहे माता-पिता, खर्च ₹2-₹4 लाख
मध्यप्रदेश में लगातार फर्टिलिटी रेट गिरता जा रहा है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट बताती हैं बीते 10 साल में मध्यप्रदेश में जन्मदर में 12.8 फीसदी की कमी आई है। ऐसे में नए कपल में माता-पिता बनने के लिए आईवीएफ तकनीक की मांग तेजी से बढ़ी है। यही कारण हैं कि सागर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में शहर का 12वां ऐसा आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर शुरू हुआ है।
इन सेंटर में आईवीएफ, ICSI, IUI, टेस्ट ट्यूब बेबी और अन्य प्रजनन तकनीकों पर उपचार, परामर्श और टेस्टिंग सुविधाएं मौजूद हैं। जबकि छोटे सेंटर भी जोड़े जाएं तो यह संख्या 20 के पार पहुंचती है। जबकि एक दशक पहले गिने चुने सेंटर ही भोपाल में मौजूद थे। इन निजी सेंटर में आईवीएफ प्रक्रिया के लिए एक दंपती पर ₹2-₹4 लाख तक का खर्च आता है। पूरी खबर पढ़ें…

अब जानिए क्या होता है इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF)?
इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) एक ऐसी तकनीक है जिसमें महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाकर फर्टिलाइज किया जाता है।
इस प्रोसेस से बने भ्रूण (एम्ब्रियो) को महिला के गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे प्रेग्नेंसी कंसीव हो सके। इसे आम भाषा में ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ भी कहते हैं और यह उन कपल के लिए मददगार है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में समस्या आती है।
IVF प्रक्रिया के मुख्य चरण
- अंडा उत्पादन (Ovarian Stimulation): महिला के अंडाशय से अधिक अंडे बनाने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं।
- अंडे निकालना (Egg Retrieval): अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडे निकाले जाते हैं।
- निषेचन (Fertilization): निकाले गए अंडों को पुरुष के शुक्राणुओं के साथ लैब में फर्टिलाइज किया जाता है।
- भ्रूण विकास (Embryo Development): निषेचित अंडे को भ्रूण बनने के लिए कुछ दिनों तक कल्चर किया जाता है।
- प्रत्यारोपण (Embryo Transfer): स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में डाला जाता है।

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