नई दिल्ली16 मिनट पहले
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वॉर्डन का तर्क था कि उसने पैरेंट के रूप में स्टूडेंट को डांटा था, ताकि वह आगे वैसी गलती न करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा डांटना किसी को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने एक हॉस्टल वॉर्डन को IPC की धारी 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना था।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा, ‘कोई यह नहीं सोच भी नहीं सकता कि डांटने से ऐसी घटना हो सकती है।’ वॉर्डन ने एक स्टूडेंट की शिकायत पर एक अन्य स्टूडेंट को डांटा था।
डांट पड़ने के बाद स्टूडेंट ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वॉर्डन का तर्क था कि उसने पैरेंट के रूप में स्टूडेंट को डांटा था, ताकि वह आगे वैसी गलती न करे। वॉर्डन ने यह भी साफ किया कि उसके और आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट के बीच कोई निजी संबंध नहीं था।
इससे पहले प्रताड़ना को आत्महत्या का उकसावा नहीं माना था

दिसंबर, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि व्यक्ति पर किसी की आत्महत्या के लिए उकसाने का दोष तभी लगाया जा सकता है, जब इसका पुख्ता सबूत हो। सिर्फ प्रताड़ना का आरोप इसके लिए काफी नहीं है।
दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट ने एक महिला के उत्पीड़न और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में उसके पति और ससुराल वालों को बरी करने से इनकार किया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए बरी कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…
ब्रेकअप को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2024 में माना था कि ब्रेकअप या शादी का वादा तोड़ना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं हो सकता। हालांकि, ऐसे वादे टूटने पर शख्स इमोशनली परेशान हो सकता है। अगर वह सुसाइड कर लेता है, तो इसके लिए किसी दूसरे व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को पटल दिया था। हाईकोर्ट ने आरोपी कमरुद्दीन दस्तगीर सनदी को अपनी गर्लफ्रेंड से चीटिंग और सुसाइड के लिए उकसाने का दोषी माना था।
हाईकोर्ट ने आरोपी को 5 साल की जेल और 25 हजार जुर्माना भरने की सजा सुनाई थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट आरोपी को बरी कर चुका था। मामले की सुनवाई जस्टिस पंकज मित्तल और उज्जल भुयान की बेंच ने की। उन्होंने इस मामले को क्रिमिनल केस न मानकर नॉर्मल ब्रेकअप केस माना था।
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