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नई दिल्ली2 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में रोज सुनवाई की परंपरा को पूरी तरह से छोड़ दिया गया है। अदालतों को इसे फिर से अपनाना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के एक दुष्कर्म के मामले में आरोपी को जमानत देने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को दौरान ये टिप्पणी की।
कोर्ट ने ये भी कहा कि दुष्कर्म जैसे मामलों में चार्जशीट दायर होने के 2 महीने के अंदर सुनवाई पूरी करें। संविधान के अनुच्छेद 21 में तुरंत सुनवाई के अधिकार को जरूरी मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी हाईकोर्ट और निचली अदालतें इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा करने के लिए एक समिति गठित करने की जरूरत है।
बेंच ने कहा-

हम ईमानदारी से मानते हैं कि यह सही समय है कि अदालतें उस प्रथा पर वापस लौटें। महत्वपूर्ण या संवेदनशील मामलों में रोज सुनवाई हो, जो तीस साल पहले की परंपरा थी। पुरानी प्रथा पर वापस जाने के उद्देश्य से, वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थिति को समझना आवश्यक है, जिसमें पुलिस के काम करने का तरीका भी शामिल है।


आखिर क्यों होती है मामले में देरी?
बेंच ने नोट किया कि न्याय मिलने में देरी की एक बड़ी वजह योगदान रोज सुनवाई न होना है। कोर्ट में सबूतों को टुकड़ों में सुना जाता है। इससे मामले कई महीनों या वर्षों तक टलते चले जाते हैं।

कोलकाता हाईकोर्ट के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश CBI की उस याचिका पर आया, जिसमें पिछले साल सितंबर में कोलकाता हाईकोर्ट के दुष्कर्म के एक मामले में एक आरोपी को जमानत देने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
2021 के पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव बाद हिंसा भड़की थी। इसमें एक दुष्कर्म मामले में मीर उस्मान अली आरोपी था। हाईकोर्ट ने अली को जमानत दे दी थी। CBI ने सुप्रीम कोर्ट में अली की जमानत रद्द करने के लिए अर्जी लगाई थी।
CBI की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे और आरोपी की ओर से अंजन दत्त ने पैरवी की। बेंच ने कहा, हम जमानत रद्द करने के लिए राजी नहीं हैं, क्योंकि आरोपी करीब एक साल से हिरासत से बाहर है।
सुप्रीम कोर्ट को जब बताया कि पीड़ित कटघरे में आई थी, लेकिन उसकी आगे की जांच 18 दिसंबर 2025 तक स्थगित कर दी गई थी। कोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताई।
हाईकोर्ट ने मांगी थी स्टेटस रिपोर्ट
8 सितंबर को कोलकाता हाईकोर्ट ने सुनवाई में देरी के चलते ट्रायल कोर्ट को मामले में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा था। इसके बाद 11 सिंतबर 2025 को एडिशनल सेशन जज, जिला पूर्वी मेदिनीपुर ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट सौंपी।
अपनी रिपोर्ट में जज ने बताया कि 25 अगस्त, 2025 को पीड़ित के बयानों की रिकॉर्डिंग को स्थगित करना पड़ा क्योंकि गवाह कटघरे में अचानक बीमार पड़ गई थी। बाद में 18 दिसंबर, 2025 तक का स्टे का कारण अन्य मामलों का बोझ बताया गया। कोर्ट ने कहा कि उनके पास 1 अगस्त, 2025 तक 4,731 लंबित मामले शामिल हैं, जिनमें सत्र, NDPS, SC/ST, भ्रष्टाचार निवारण, और विभिन्न दीवानी मामले हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बोला- पीड़ित की उपस्थिति सुनिश्चित करें
सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि जांच की तारीख अब 24 अक्टूबर, 2025 तक कर दी गई है। बेंच ने सरकारी वकील को निर्देशित किया गया कि वह आगे की बहस के लिए पीड़ित की उपस्थिति सुनिश्चित करे।
एक बार पीड़ित के बयान पूरे हो जाने के बाद, ट्रायल कोर्ट को यह देखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि अन्य गवाहों की जल्द से जल्द जांच हो। साथ ही ये भी सुनिश्चित करने को कहा कि 31 दिसंबर, 2025 तक फैसले के साथ सुनवाई पूरी हो सके।
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