चंडीगढ़। गुजरात की गिफ्ट सिटी की तर्ज पर अब चंडीगढ़ में सिफ्ट सिटी मॉडल विकसित किया जा रहा है। नीति आयोग के सहयोग से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट में देश-विदेश की नामी कंपनियां निवेश करेंगी। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में बनने वाले इस मॉडल को फाइनेंशियल और आईटी हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
डीसी कम इंडस्ट्री सेक्रेटरी निशांत कुमार यादव ने बताया कि सिफ्ट सिटी प्रोजेक्ट का पूरा खाका नीति आयोग के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट हायर करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 20 अक्तूबर तक फाइनल कर लिया जाएगा। कंसल्टेंट नीति आयोग के सुझाए गए मानकों के अनुसार डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करेगा।
इस प्रोजेक्ट में निवेश करने वाली कंपनियों को फॉरेक्स एक्सचेंज की सुविधा दी जाएगी ताकि विदेशी निवेशक अपनी मुद्रा में निवेश और मुनाफा दोनों प्राप्त कर सकें। इसके अलावा टैक्स में पूरी छूट देने पर भी नीति आयोग और प्रशासन मंथन कर रहे हैं। डीसी निशांत यादव ने बताया कि इसका उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना और भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बढ़त देना है।
आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर को मिलेगी नई दिशा
बीते एक दशक में चंडीगढ़ में आईटी सेक्टर का विकास ठहराव पर रहा है। सिफ्ट सिटी मॉडल के लागू होने से चंडीगढ़ न केवल आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर का केंद्र बनेगा बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अब तक पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) और पंजाब विश्वविद्यालय से पढ़े छात्र गुरुग्राम, नोएडा, हैदराबाद और बंगलूरू जैसे शहरों का रुख करते थे लेकिन सिफ्ट सिटी के आने से स्थानीय स्तर पर ही बड़ी कंपनियों में नौकरी के अवसर मिल सकेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन और नीति आयोग इस प्रोजेक्ट को लेकर पहले ही कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क कर चुके हैं। सिफ्ट सिटी के पूरा होने पर यह न केवल उत्तरी भारत का पहला फाइनेंशियल हब बनेगा बल्कि आने वाले वर्षों में इसे देश का मिनी गिफ्ट सिटी मॉडल भी कहा जा सकेगा।


























