नई दिल्ली27 मिनट पहले
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सलमान रुश्दी की लिखी हुई करीब 30 किताबें हैं, जिनमें फिक्शन, नॉन-फिक्शन उपन्यास और बच्चों पर लिखी गई किताबें भी शामिल हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 1988 में सलमान रुश्दी की विवादित किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के इम्पोर्ट पर लगा बैन हटा दिया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी बैन लगाने वाला नोटिफिकेशन पेश नहीं कर पाए, इसलिए यह माना जाना चाहिए कि यह मौजूद नहीं है। जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने यह फैसला 5 नवंबर को सुनाया था।
जानिए ये मामला कैसे कोर्ट पहुंचा किताब के इम्पोर्ट को लेकर 2019 में संदीपन खान नाम के शख्स ने एक याचिका लगाई थी। संदीपन ने कहा, उन्होंने ‘द सैटेनिक वर्सेज’ किताब मंगवाई थी। लेकिन कस्टम विभाग की तरफ से 36 साल पहले जारी किए गए नोटिफिकेशन के चलते बुक इम्पोर्ट नहीं हो सकी। लेकिन यह न तो किसी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध थी और न ही किसी संबंधित अधिकारी के पास इससे जुड़े दस्तावेज मौजूद थे।

‘द सैटेनिक वर्सेज’ किताब क्यों है विवादित
‘द सैटेनिक वर्सेज’ उपन्यास का हिंदी में अर्थ ‘शैतानी आयतें’ हैं। इस किताब के नाम पर ही मुस्लिम धर्म के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। रुश्दी ने अपनी इस किताब में एक काल्पनिक किस्सा लिखा है। किस्सा कुछ इस तरह है कि दो फिल्म कलाकार हवाई जहाज के जरिए मुंबई से लंदन जा रहे हैं। इनमें एक फिल्मी दुनिया का सुपरस्टार जिबरील है और दूसरा ‘वॉयस ओवर आर्टिस्ट’ सलादीन है।
बीच रास्ते में इस प्लेन को कोई सिख आतंकी हाइजैक कर लेता है। इसके बाद विमान अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुजर रहा होता है, तभी पैसेंजर से आतंकियों की बहस होने लगती है। गुस्से में आतंकवादी विमान के अंदर बम विस्फोट कर देता है।
इस घटना में जिबरील और सलादीन दोनों समुद्र में गिरकर बच जाते हैं। इसके बाद दोनों की जिंदगी बदल जाती है। फिर एक रोज एक धर्म विशेष के संस्थापक के जीवन से जुड़े कुछ किस्से पागलपन की ओर जा रहे जिबरील के सपने में आता है। इसके बाद वह उस धर्म के इतिहास को एक बार फिर नई तरह से स्थापित करने की सोचता है। इसके आगे रुश्दी ने अपने कहानी के किरदार जिबरील और सलादीन के किस्से को कुछ इस अंदाज में लिखा है कि इसे ईशनिंदा माना गया।
किताब पर बैन और जान से मारने का फतवा

ये तस्वीर उस वक्त की है जब ‘सैटेनिक वर्सेज’ उपन्यास के बाजार में आते ही दुनिया के कई देशों में विरोध शुरू हो गया था। (तस्वीर साभार: The British Library)
भारत पहला देश था जिसने इस उपन्यास को बैन किया। उस वक्त देश में राजीव गांधी की सरकार थी। इसके बाद पाकिस्तान और कई अन्य इस्लामी देशों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। फरवरी 1989 में रुश्दी के खिलाफ मुंबई में मुसलमानों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन पर पुलिस की गोलीबारी में 12 लोग मारे गए और 40 से अधिक घायल हो गए थे।
ईरान की इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्ला खुमैनी ने उनके खिलाफ 1989 में मौत का फतवा जारी किया था। 3 अगस्त 1989 को ही सेंट्रल लंदन के एक होटल पर RDX विस्फोट कर सलमान रुश्दी का मारने की कोशिश हुई, लेकिन वह इस हमले में बाल-बाल बच गए। बाद में मुजाहिद्दीन ऑफ इस्लाम ने इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। मानव बम बने एक शख्स ने होटल के अंदर इस विस्फोट को अंजाम दिया था।
इसके बाद से सलमान रुश्दी छिपकर और पुलिस प्रोटेक्शन में जिंदगी जी रहे थे। ईरानी सरकार ने सार्वजनिक तौर पर 10 साल बाद यानी 1998 में कहा कि अब वो सलमान की मौत का समर्थन नहीं करते। हालांकि, फतवा अपनी जगह पर कायम रहा।
2006 में हिजबुल्ला संगठन के प्रमुख ने कहा था कि सलमान रुश्दी ने जो ईशनिंदा की है उसका बदला लेने के लिए करोड़ों मुस्लिम तैयार हैं। पैगंबर के अनादर का बदला लेने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। 2010 में आतंकी संगठन अलकायदा ने एक हिट लिस्ट जारी किया था। इसमें इस्लाम धर्म के अपमान करने के आरोप में सलमान रुश्दी को भी जाने से मारने की बात कही गई थी।
‘सैटेनिक वर्सेज’ विवाद में 59 लोगों की जान गई
सलमान रुश्दी की किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर दुनिया भर के कई देशों में हो रहे हिंसक विरोध में 59 लोगों मारे गए हैं। इन मृतकों की संख्या में इस किताब के प्रकाशक और दूसरे भाषा में अनुवाद करने वाले लोग भी शामिल हैं।
जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी ने रुश्दी की किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’ की अपने भाषा में अनुवाद किया था। इसके कुछ दिनों बाद ही उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसी तरह ‘सैटेनिक वर्सेज’ के इटैलियन अनुवादक और नॉर्वे के प्रकाशक पर भी जानलेवा हमले किए जा चुके हैं।
यह है वो ‘सैटेनिक वर्सेज’ किताब, जिसको लेकर विवाद हुआ था।
कौन हैं सलमान रुश्दी? 19 जून 1947 को मुंबई में पैदा होने वाले सलमान रुश्दी एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार से हैं। जन्म के कुछ सालों बाद ही रुश्दी का परिवार ब्रिटेन में रहने लगा। ऐसे में स्कूली पढ़ाई इंग्लैंड के फेमस रग्बी स्कूल से करने के बाद रुश्दी ने आगे की शिक्षा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से की।
फिर 1968 में इतिहास में MA की डिग्री हासिल करने के बाद 1970 में उन्होंने लंदन में एक एडवरटाइजमेंट राइटर के तौर पर नौकरी शुरू कर दी। इसके बाद 1975 में रुश्दी ने ग्राइमस नाम से पहली किताब पब्लिश की।
सलमान रुश्दी ने की थी 4 शादियां

इस तस्वीर में सलमान रुश्दी की चौथी पत्नी पद्मालक्ष्मी के साथ नजर आ रहे हैं।
लेखक सलमान रुश्दी की 4 शादियां हो चुकी हैं। सलमान की पहली शादी 1976 में क्लेरिसा लुआर्ड से हुई थी। करीब 11 साल के बाद क्लेरिसा का यह रिश्ता टूट गया था। इसके बाद रुश्दी ने दूसरी शादी अमेरिकी उपन्यासकार मैरिएन विगिन्स से की थीं। 1993 में रुश्दी ने विगिन्स से तलाक ले लिया था।
इसके बाद 1997 में एलिजाबेथ नाम की महिला से सलमान रुश्दी ने शादी की थी। साल 2004 में रुश्दी ने चौथी शादी की। इस बार उन्होंने एक भारतीय मूल की अमेरिकी एक्ट्रेस और मॉडल पद्मालक्ष्मी से शादी की थी। हालांकि 2 जुलाई 2007 को रुश्दी ने पद्मा से भी तलाक ले लिया था।
अपने दूसरे ही उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ के लिए 1981 में ‘बुकर प्राइज’ और 1983 में ‘बेस्ट ऑफ द बुकर्स’ पुरस्कार से सलमान रुश्दी सम्मानित किए गए। सलमान रुश्दी की लिखी हुई करीब 30 किताबें हैं, जिनमें फिक्शन, नॉन-फिक्शन उपन्यास और बच्चों पर लिखी गई किताबें भी शामिल हैं।
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