नई दिल्ली48 मिनट पहले
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रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने मंगलवार को मॉस्को में VTB इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित किया।
रूस ने कहा है कि वह जानता है कि अमेरिका की तरफ से भारत पर रूसी तेल न खरीदने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन वह भारत और अमेरिका के रिश्तों में दखल नहीं देगा। यह बात क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कही।
दूसरी तरफ रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि वो वह अपने भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ट्रेड बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि रूस अपने प्रमुख साझेदारों भारत और चीन के साथ आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है।
मॉस्को में VTB इन्वेस्टमेंट फोरम में बोलते हुए पुतिन ने बताया कि पिछले तीन सालों में भारत और चीन के साथ रूस का व्यापार काफी बढ़ा है।
पुतिन ने दावा किया कि दुनिया में बढ़ती अशांति उन देशों की वजह से है जो अपने दबदबे का इस्तेमाल दूसरों पर दबाव डालने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश प्रतिस्पर्धा खत्म करना चाहते हैं, लेकिन वे इसमें असफल हो रहे हैं।
रूस ने भारत की विदेश नीति की तारीफ की
क्रेमलिन पेस्कोव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की भी तारीफ की। पेस्कोव ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को लेकर बेहद स्वतंत्र है और हम इसकी सराहना करते हैं।
पेस्कोव ने बताया कि रूस ऐसे तरीके तलाश रहा है जिससे कि वह तेल खरीददारों को आसानी से तेल बेच सके।
भारत ने रूस से तेल आयात घटाया
ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत पर रूसी तेल की खरीद के चलते 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। इसके चलते भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया था।
इसके बाद भारत ने सितंबर में रूस से 17% कम तेल आयात किया था। दिसंबर में यह तीन साल के न्यूनतम स्तर पर आ सकता है। अभी भारत रूस से करीब 18 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) क्रूड ऑयल खरीद रहा है। दिसंबर में यह 6-6.5 लाख bpd रहने का अनुमान है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिकी, यूरोपीय और ब्रिटिश प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो, इसके लिए रूसी कच्चे तेल की खरीदी में तेजी से कटौती शुरू कर दी है।
रिफाइनर्स अब रूसी तेल का अल्टरनेटिव सोर्स ढूंढ रहे हैं। रूस से तेल ना खरीदने का मुख्य कारण अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के रूस पर ताजा प्रतिबंध हैं।

दो दिन बाद भारत आ रहे पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देश व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर बड़ी बातचीत करेंगे। भारत और रूस कई राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
दूसरी तरफ अमेरिका लगातार भारत से रूसी तेल की खरीद घटाने का दबाव बना रहा है। अमेरिका में नए कानून पर भी विचार हो रहा है, जिससे रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर और पेनल्टी लग सकती है।
भारत रूसी क्रूड ऑयल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार
भले ही भारत ने रूस से क्रूड ऑयल की खरीद कम की है। इसके बावजूद यह रूसी तेल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
अक्टूबर में रूस से 2.5 बिलियन डॉलर (करीब 22.17 हजार करोड़ रुपए) वैल्यू का कच्चा तेल देश में आया। यह जानकारी हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने अपनी रिपोर्ट में दी।
CREA के अनुसार, चीन 3.7 बिलियन डॉलर (करीब 32.82 हजार करोड़ रुपए) के इम्पोर्ट के साथ पहले नंबर पर रहा।
कुल मिलाकर, रूस से भारत का फॉसिल फ्यूल आयात 3.1 बिलियन डॉलर (करीब ₹27.49 हजार करोड़) पहुंच गया है, जबकि चीन का कुल आंकड़ा 5.8 बिलियन डॉलर (करीब ₹51.44 हजार करोड़) रहा। अमेरिकी प्रतिबंध का असर दिसंबर के आंकड़ों में दिख सकता है, लेकिन भारत अभी भी खरीदारी जारी रखे हुए है।













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