चंडीगढ़। नगर निगम इस कदर कंगाल हो चुका है कि अब तक नियमित कर्मियों को भी जनवरी माह की सैलरी नहीं मिली है। कर्मचारी भी परेशान हो रहे हैं। निगम को प्रशासन के ग्रांट का इंतजार है। इस बीच मेयर हरप्रीत कौर बबला ने मंगलवार शाम पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की और कर्मचारियों को सैलरी व अन्य खर्चों के लिए तत्काल 170 करोड़ रुपये की मांग की।
मेयर ने प्रशासक को बताया कि निगम भीषण वित्तीय संकट से जूझ रहा है, जिससे आवश्यक सेवाओं को जारी रखना भी कठिन होता जा रहा है। बताया कि निगम के गठन के साथ प्रशासन के कई विभाग, जैसे इंजीनियरिंग विभाग, मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं इसके अधीन आ गए। निगम मुख्य रूप से प्रशासन से मिलने वाली अनुदान सहायता पर निर्भर है। निगम भी पानी के बिल व संपत्ति कर से कमाई करता है लेकिन वह बहुत कम होता है। बताया कि निगम 2,000 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव करता है। हर साल 270 किलोमीटर सड़कों का निर्माण या मरम्मत की जाती है लेकिन इससे कोई राजस्व उत्पन्न नहीं होता। 1800 मोहल्ला पार्क, 100 से अधिक बड़े पार्क व ग्रीन बेल्ट और 1.75 लाख पेड़-पौधों की देखरेख करता है। यह सब निगम के खर्चे पर किया जाता है लेकिन कोई आय नहीं होती। प्रमुख सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव भी निगम ही करता है। प्रशासन से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती।













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