
punjab lok sabha election
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वैसे तो जालंधर खेल के सामान के लिए देशभर में मशहूर है, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में राजनीति के माहिर खिलाड़ियों का पाला-बदल खेल यहां ज्यादा चर्चा में है। इसी की बदौलत प्रतिद्वंद्वी दलों ने एक दूसरे के सामने चुनौती पेश कर सियासी गुणा-भाग को उलझा दिया है।
दावे भले हों, पर किसी को अपनी जीत पक्की नहीं लग रही। यही वजह है कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेताओं से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक को जालंधर के मैदान में उतरना पड़ा है। सभी दलों के थिंक टैंक महीनों से यहां डेरा डाले हैं। भाजपा ने तो गुजरात के माहिरों की पूरी टीम यहां उतार दी है।
यहां चारों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है। दरअसल, वर्ष 1999 से 2019 तक यह सीट कांग्रेस के पास रही है। वर्ष 2014 और 2019 के विजेता कांग्रेसी सांसद संतोख चौधरी के निधन के बाद वर्ष 2023 में उप चुनाव हुए तो आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस नेता सुशील रिंकू को अपने पाले में कर कांग्रेस के खिलाफ ही खड़ा कर दिया।
आप का यह दांव सही पड़ा। रिंकू ने संतोख चौधरी की पत्नी करमजीत कौर को हराकर कांग्रेसी किला ध्वस्त कर दिया। 2024 के चुनाव में भी आप ने रिंकू पर भरोसा जताया और टिकट की घोषणा कर दी। इसी बीच भाजपा ने उन्हें तोड़कर अपना प्रत्याशी बना दिया।



























