
जीत का जश्न मनाते परिजन।
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जालंधर के रहने वाले भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी मनदीप सिंह के पिता ने सुबह ही बेटे से फोन पर बात की थी। पिता रविंद्र सिंह ने सुबह मनदीप से फोन पर कहा था कि बेटे हारना नहीं है… हर हाल में जीतना है… पूरी ताकत से खेलो। ऐसा खेलना कि देखने वाले हमेशा इस जीत को याद रखें। रविंद्र सिंह ने टीम के सभी खिलाड़ियों को मजबूती के साथ खेलने के लिए प्रेरित किया था।
मनदीप सिंह अटैकिंग खिलाड़ी माने जाते हैं। पिता रविंद्र सिंह ने कहा कि हमारी टीम आज पूरी ताकत के साथ खेली। बेशक इससे पहले जर्मनी मैच में हमारी टीम हार गई थी और गोल्ड जीतने से चूक गई, लेकिन उन्हें इस बार पूरी उम्मीद थी कि हमारी टीम का प्रदर्शन बेहतर रहेगा तथा ब्रांज मेडल के लिए अपनी जी जान लगा देगी। हुआ भी ऐसा, भारतीय टीम दमखम के साथ खेली।
टीम ने अपनी प्रतिभा का शानदान प्रदर्शन किया
हॉकी के पूर्व कप्तान पद्मश्री परगट सिंह का कहना है कि पिछले कई सालों से भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। ऐसे में भारतीय चयनकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस बार भारतीय हॉकी टीम अच्छा खेलेगी और ओलंपिक में पदक जीतेगी। ऐसा ही हुआ और भारतीय टीम ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। मैच में जालंधर के चार खिलाड़ियों मनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, हार्दिक सिंह व सुखजीत सिंह और हरमनप्रीत ने बेहतरीन प्रदर्शन किया व कांस्य पदक के अपने नाम करने में अहम भूमिका निभाई। मनप्रीत सिंह, जोकि जालंधर के गांव मिट्ठापुर के रहने वाले हैं और भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान रहे हैं उन्होंने अपना चौथा ओलिंपिक खेला। वहीं, मनदीप सिंह ने भी टीम की जीत में अपनी अहम भूमिका निभाई है और कांस्य पदक देश के नाम किया है। हरमनप्रीत ने पूरे मैच में अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया।
पंजाब के शेरों ने दिखाई अपनी ताकत
हॉकी टीम के पूर्व कप्तान गगनअजीत सिंह का कहना है कि पंजाब के शेरों ने अपनी ताकत को टोक्यो ओलंपिक के बाद दिखा दिया है। पिछले साल एशियन गेम्स में पंजाबियों ने इतिहास दोहराकर ओलंपिक में अपने प्रदर्शन के बारे में एहसास करवा दिया था। हॉकी के पूर्व खिलाड़ी मनप्रीत ढिल्लों का कहना है कि हॉकी में पंजाब का योगदान ऐतिहासिक है।


























