क्वेटा24 मिनट पहले
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मंजूर बलोच युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। खुद उनकी उम्र अभी सिर्फ 29 साल है। (फाइल)
पाकिस्तान के अहम पश्तून नेता और पश्तून तहाफ्फुज मूवमेंट (PTM) के चीफ मंजूर पश्तीन लापता हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पश्तून को इंटेलिजेंस एजेंसी ISI ने अगवा किया है।
इस मामले में दो बातें अहम हैं। पहली- बीते दिनों मंजूर ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर को पूरी तरह खोलने की मांग की थी। इसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दूसरी- पश्तीन कुछ ही महीने पहले जेल से रिहा हुए थे। उन्हें बलूचिस्तान का बड़ा नेता माना जाता है और इसी वजह से वो फौज और ISI की आंखों में हमेशा खटकते रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद कहां हैं मंजूर
- 29 साल के मंजूर सोमवार बलूचिस्तान के चमन से तुरबत जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। मंजूर पर आरोप है कि उनकी कार से पुलिस की गाड़ी पर फायरिंग की गई थी। पश्तीन की पार्टी ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था।
- सवाल ये है कि अगर मंजूर को क्रिमिनल केस में गिरफ्तार किया गया था तो उन्हें कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया। PTM लीडर जुबेर शाह ने कहा-गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को मंजूर को खैबर पख्तूनख्वा लाया गया था। वहां से उन्हें इंटेलिजेंस एजेंसी ने किडनैप कर लिया।
- मंजूर की गिरफ्तारी पर पूर्व सांसद मोहसिन डावर ने कहा- फिक्र की बात है कि 4 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद से अब तक मंजूर को किसी कोर्ट में पेश नहीं किया गया है। उन्हें जबरन गायब किया गया है। सरकार खुद कानून का पालन नहीं कर रही है। हमारी मांग है कि उन्हें फौरन नजदीकी कोर्ट में पेश किया जाए।

मंजूर पश्तीन ने बलूचिस्तान से अगवा किए गए लोगों की रिहाई के लिए कई आंदोलन किए हैं। इस गुनाह का आरोप फौज पर लगता रहा है। (फाइल)
पार्टी ने सवाल उठाए
- सोशल मीडिया पर मंजूर के अकाउंट से पार्टी ने एक पोस्ट किया। कहा- अगर PTM चीफ को इस तरह उठाकर गायब किया जाएगा तो आम लोगों का क्या होगा? यह तो सभी सियासी लोगों पर सवालिया निशान है। जुबेर के मुताबिक- मंगलवार को मंजूर को खैबर के डेरा इस्माइल खान के एक पुलिस स्टेशन लाया गया था। इसके बाद उन्हें कुछ अज्ञात लोग अपने साथ ले गए।
- जुबेर ने आगे कहा- हमें नहीं मालूम कि अब वो कहां है। सादे कपड़ों में आए लोग उन्हें अपने साथ कैसे ले गए। हमें लगता है कि वो खुफिया एजेंसी के आदमी थे। दूसरी तरफ, डेरा इस्माइल खान के पुलिस अफसर ने इस बात से इनकार किया है कि मंजूर को उनके थाने में लाया गया था।
- पूर्व सांसद अफरसाईब खटक ने कहा- मंजूर की गुमशुदगी पश्तून युवाओं के अहिंसक आंदोलन को दबाने की एक और कोशिश है। बलोच युवाओं को परेशान किया जा रहा है और तमाम पार्टियां चुप हैं।
- बलूचिस्तान की केयरटेकर सरकार के इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर जान अचकजई ने कहा- PTM पाकिस्तान विरोधी संगठन है। मंजूर के बलूचिस्तान जाने पर रोक थी तो वहां वो क्यों गए। चमन में उन्होंने जो रैली की, उसके लिए मंजूरी भी नहीं ली थी। फायरिंग की घटना के बारे में हमारे पास जानकारी नहीं है।

मंजूर को कुछ महीने पहले चुपचाप रिहा किया गया था। कई दिनों बाद मीडिया को इसकी जानकारी मिली थी। तब भी उन्होंने बलूचिस्तान से लापता लोगों के लिए आंदोलन चलाया था और इसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। (फाइल)
फौज और सरकार मंजूर से परेशान क्यों
- PTM 2014 में बलूचिस्तान के लोगों को उनके बुनियादी हक दिलाने के लिए बनी। इसमें पठान और बलोचों के लोग शामिल हैं। उन्हें कुछ महीने पहले ही जेल से रिहा किया गया था। खास बात यह है कि हाईकोर्ट से जमानत के बाद भी मंजूर को जेल में ही रखा गया था।
- मंजूर की गिरफ्तारी की एक बड़ी वजह पाकिस्तान सरकार का कुछ महीने पहले लिया गया फैसला है। दरअसल, सरकार का दावा है कि पाकिस्तान में 17 लाख अफगान नागरिक गैर कानूनी तौर पर रह रहे हैं। इन्हें निकालने के लिए 31 अक्टूबर डेडलाइन तय की गई थी। हजारों अफगानी चमन बॉर्डर से देश लौट चुके हैं। कुछ को न लौटने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया।
- मंजूर पश्तीन और PTM इस मुहिम का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर को खोल दिया जाना चाहिए और आम लोगों की आवाजाही आसानी से होनी चाहिए। अफगान लोगों को पाकिस्तान आने के लिए वीजा मेंडेटरी नहीं किया जाना चाहिए।
- PTM फौज और सरकार की आंखों में सबसे ज्यादा इसलिए खटकती है, क्योंकि पाकिस्तानी फौज ने हजारों बलोच नागरिकों को अगवा किया और इनका आज तक कोई पता नहीं है। फौज के दबाव में सरकार और ज्यूडिशियरी चुप्पी साध लेती हैं। इसके अलावा अनगिनत बलोच युवाओं को मार डाला जा चुका है। फौज का आरोप है कि PTM और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के गहरे रिश्ते हैं।



























