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- Pain Of The Sister Of 71 War Hero Major General Kulwant Singh Pannu | We Are Forgotten
नई दिल्लीएक घंटा पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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मेजर जनरल कुलवंत सिंह पन्नू की बहन राज पन्नू कनाडा के टोरंटो में रह रही हैं।
विजय दिवस (16 दिसंबर) की पूर्व संध्या पर सेना प्रमुख ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के नायकों को सम्मानित किया। इस बीच जंग के हीरो ले. कर्नल कुलवंत सिंह पन्नू की बहन राज पन्नू ने अपनी पीड़ा बयां की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जनरल एएके नियाजी को सरेंडर का पैगाम थमाने वाले उनके भाई को सरकार ने भुला दिया है।

16 दिसंबर को 90 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया था।
आखिरी बार CDS रावत ने याद किया था
कनाडा के टोरंटो में जा बसीं राज पन्नू ने फोन पर भास्कर को बताया कि आखिरी बार उन्हें जनरल बिपिन रावत ने याद किया था। जनरल रावत के सहयोगी ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर ने 9 दिसंबर की सुबह फोन कर भारत आने का न्योता दिया था। उन्होंने बताया था कि सीडीएस ने उनके ठहरने के इंतजाम कर दिए हैं। उसी शाम जनरल रावत और लिड्डर का हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया।

कुलवंत पन्नू को वीरता के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
भारतीय सेना के 2 पैरा के जांबाज अफसर पन्नू की टीम को वायु सेना के विमान से ढाका से 90 किमी दूर साड़ियों के शहर तंगेल में उतारा गया था। तब के पूर्वी पाकिस्तान में दुश्मन डिफेंस लाइन में पैरा ट्रूपर पन्नू आगे बढ़े और 15 दिसंबर को ढाका में प्रवेश कर गए।
एजूटेंट निर्भय शर्मा और बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के नायक कादिर टाइगर सिद्दीकी के साथ पन्नू सैन्य मुख्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने जनरल नियाजी को भारतीय सेना का फरमान थमाया था। इस पर लिखा था- ‘आपका खेल खत्म हो गया। सरेंडर कर दो।’



















