अंकारा/निकोसिया4 घंटे पहले
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तुर्किये जा रही नाव रविवार को उत्तरी साइप्रस से कुछ किमी दूर पलटी।
मेडिटेरियन सी में तुर्किये जा रही फेरी बोट रविवार को समुद्र में पलट गई। यह फेरी यूरोपीय देश साइप्रस के उत्तरी तट से 270 से ज्यादा यात्रियों के साथ रवाना हुई थी। तुर्किये की मीडिया के मुताबिक, हादसे में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है।
उत्तरी साइप्रस के प्रधानमंत्री उनाल उस्तेल ने बताया कि अब तक 237 लोगों को बचा लिया गया है। कई यात्रियों ने पलटी बोट के ऊपर चढ़कर अपनी जान बचाने की कोशिश की थी। वहीं, 24 अन्य लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
उन्होंने बताया कि खराब मौसम के बीच फेरी रवाना हुई थी और निकलने के करीब 15 मिनट बाद उसमें पानी भरने लगा। इसके बाद यह हादसा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, राहत और बचाव दल मौके पर लगातार जुटे हुए हैं।
हादसे से जुड़ी तस्वीरें…
मौके पर कोस्ट गार्ड की नावें, नागरिक जहाज और निजी कंपनियों के जहाज बचाव अभियान में जुटे हैं। तट पर एंबुलेंस भी तैयार रखी गई हैं।
कई लोगों ने पलटी बोट के ऊपर चढ़कर अपनी जान बचाई।
साइप्रस तट से करीब 7 किमी दूर हुआ हादसा
तुर्किये मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तरी साइप्रस तट से करीब 7.5 किमी दूर ही यह हादसा हुआ। कैटामरैन शैली की यह फेरी मर्सिन प्रांत के तुर्किये पोर्ट तासुकु जा रही थी। यह उत्तरी साइप्रस के काइरेनिया पोर्ट से रवाना हुई थी।
कैटामरैन एक खास तरह की नाव या फेरी होती है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें नीचे दो समानांतर हिस्से (हुल) होते हैं। यही डिजाइन इसे पानी में ज्यादा स्थिर रखने में मदद करता है।
लेकिन यह पूरी तरह पलटने के खतरे से सुरक्षित नहीं होता। बहुत खराब मौसम, तेज हवाओं और ऊंची लहरों में गलत तरीके से चलाने पर इसके पलटने का खतरा हो सकता है। जरूरत से ज्यादा यात्रियों या सामान का भार भी जोखिम बढ़ा सकता है।
सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अगर कैटामरैन पलट जाए, तो उसे दोबारा सीधा करना सामान्य जहाज की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
मेडिटेरियन में नाव पलटने की घटनाएं आम
- मेडिटेरियन सी में नाव पलटने की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन साइप्रस के पास बड़ी पैसेंजर फेरी का पलटना आम बात नहीं है।
- मेडिटेरियन दुनिया के उन समुद्री इलाकों में है जहां खासकर माइग्रेंट्स की छोटी और ओवरलोडेड नावें अक्सर हादसे का शिकार होती हैं।
- साइप्रस के आसपास भी ऐसे हादसे हुए हैं। मार्च 2025 में केप ग्रेको के पास एक माइग्रेंट बोट पलटी थी, जिसमें 7 लोगों की मौत हुई थी।
- लेकिन आज जैसा मामला, जिसमें करीब 270 लोगों वाली पैसेंजर फेरी पलट गई, काफी असामान्य और गंभीर समुद्री हादसा है।
1987 से 2022 तक, ऐसे बदले फेरी सुरक्षा के नियम
1987: हेराल्ड हादसे के बाद पहली बार नियम बदले
बेल्जियम के पास हेराल्ड ऑफ फ्री एंटरप्राइज फेरी पलटने से 193 लोगों की मौत हुई। जहाज का अगला दरवाजा खुला रह गया था, जिससे पानी अंदर भर गया। इसके बाद नियम बदले गए। दरवाजा खुला है या बंद, इसकी जानकारी ब्रिज पर मिलना जरूरी हुआ। साथ ही कैमरा या पानी रिसने की चेतावनी देने वाली व्यवस्था लगाना जरूरी किया गया।
1994: एस्टोनिया हादसे ने उठाया स्थिरता का सवाल
बाल्टिक सागर में एस्टोनिया फेरी डूबने से 850 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इसके बाद 1995 में नियम बदले गए। जहाज में पानी भरने के बाद भी उसके स्थिर रहने और न पलटने की क्षमता जांचना जरूरी हुआ। आपातकालीन सूचना और सुरक्षित निकासी के नियम भी मजबूत किए गए।
1998: कप्तान ही नहीं, कंपनी भी जिम्मेदार
नए सुरक्षा प्रबंधन नियमों में जहाज चलाने वाली कंपनी की जिम्मेदारी तय हुई। यानी सुरक्षा सिर्फ कप्तान और क्रू का काम नहीं रही।
2010: हादसे के बाद भी जहाज बंदरगाह लौट सके
नए नियमों में ‘सुरक्षित रूप से बंदरगाह लौटने’ की व्यवस्था की गई। यानी गंभीर नुकसान के बाद भी जहाज के जरूरी सिस्टम कुछ समय तक काम करते रहें, ताकि यात्रियों को तुरंत समुद्र में उतारने की नौबत न आए और जहाज सुरक्षित बंदरगाह लौट सके।
2022: घरेलू फेरी की सुरक्षा के लिए भी गाइडलाइन बनीं अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक फेरी हादसों में 95% से ज्यादा मौतें घरेलू मार्गों पर होती हैं। इसलिए 2022 में घरेलू फेरी की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए। इनमें जहाज की जांच, कर्मचारियों की संख्या, सुरक्षा इंतजाम, आपात स्थिति में संपर्क और बचाव के साधनों के नियम शामिल हैं।
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