स्टॉकहोम12 मिनट पहले
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2026 का मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को दिया गया है। इन वैज्ञानिकों ने ऑप्टोजेनेटिक्स नाम की ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद की, जिससे रोशनी की मदद से दिमाग की अलग-अलग तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित करके उनके काम को समझा जा सकता है।
पहले वैज्ञानिकों के लिए यह पता लगाना मुश्किल था कि दिमाग की कौन-सी तंत्रिका कोशिका किस काम के लिए जिम्मेदार है। ऑप्टोजेनेटिक्स की मदद से अब वैज्ञानिक याददाश्त, भावनाओं और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। इससे डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों और दिमाग से जुड़ी दूसरी बीमारियों पर रिसर्च करना भी आसान हुआ है।
नोबेल कमेटी के मुताबिक, इन तीनों वैज्ञानिकों की खोज ने दिमाग को समझने के लिए रिसर्च का एक नया रास्ता खोल दिया है। इस तकनीक का इस्तेमाल आंखों की बीमारियों पर भी किया जा रहा है। वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि इसकी मदद से दृष्टि खो चुके लोगों की आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है या नहीं।
वैज्ञानिकों ने रोशनी को महसूस करने वाला प्रोटीन खोजा
यह खोज एक बहुत छोटे शैवाल (एल्गी) से शुरू हुई। पीटर हेगेमैन जानना चाहते थे कि क्लैमाइडोमोनास नाम का शैवाल रोशनी की तरफ कैसे मुड़ता है।
रिसर्च के दौरान हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को इस शैवाल में चैनलरोडॉप्सिन नाम का एक खास प्रोटीन मिला। यह प्रोटीन रोशनी को महसूस करता था। नीली रोशनी पड़ने पर इसमें एक रास्ता खुल जाता था और कोशिका के अंदर आवेशित कण जाने लगते थे। इससे इलेक्ट्रिक सिग्नल बनने लगता था।
वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन को दूसरी कोशिकाओं में डालकर देखा। वे कोशिकाएं भी रोशनी की तरफ मुड़ने लगीं।
इसके बाद अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल डाइसेरोथ ने यही तरीका दिमाग की कोशिकाओं पर आजमाया और न्यूरॉन्स में चैनलरोडॉप्सिन बनाने वाला जीन पहुंचाया। अब नीली रोशनी डालकर इन कोशिकाओं को सक्रिय किया जा सकता था।
डाइसेरोथ ने इस खोज को 2005 में प्रकाशित किया। 2007 में उन्होंने इसे जिंदा चूहों के दिमाग में भी काम करके दिखाया। यहीं से ऑप्टोजेनेटिक्स का रास्ता खुला, जिसमें रोशनी की मदद से दिमाग की खास तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
नोबेल प्राइज: दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे बड़े और सम्मानित पुरस्कारों में से एक है। यह उन लोगों या संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में कोई बड़ा और महत्वपूर्ण काम किया हो।
हर साल 6 क्षेत्रों में पुरस्कार दिए जाते हैं:
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 287 नाम आए हैं। इनमें 208 लोग और 79 संगठन शामिल हैं। पिछले साल 338 नाम आए थे। अब तक सबसे ज्यादा 376 नाम 2016 में आए थे
नोबेल पुरस्कार जीतने वाले को तीन चीजें मिलती हैं:
- पदक
- प्रमाणपत्र
- पुरस्कार राशि
2026 में हर पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर है। यह करीब 11.5 करोड़ रुपए के बराबर है।
पुरस्कार पाने वालों को दिसंबर में स्वीडन के स्टॉकहोम और नॉर्वे के ओस्लो में पदक, प्रमाणपत्र और पुरस्कार राशि दी जाती है।
इनमें शांति का नोबेल पुरस्कार सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। इसकी वजह यह है कि इसके लिए दुनिया के बड़े नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों के नाम सामने आते हैं।
पिछले साल का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया था। वह 2024 से छिपकर रह रही थीं।
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नोबेल प्राइज से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अपडेट्स
10:47 AM5 अक्टूबर 2026
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तीनों विजेता को जानिए
कार्ल डाइसेरोथ: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बायोइंजीनियरिंग और मनोचिकित्सा के प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपनी टीम के साथ ऐसी बेहद पतली ऑप्टिकल फाइबर विकसित कीं, जिनकी मदद से दिमाग की तंत्रिका कोशिकाओं को सक्रिय किया जा सका। पहली बार इससे खास तरह के व्यवहार को भी देखा गया।
पीटर हेगेमैन: बर्लिन की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी में एक्सपेरिमेंटल बायोफिजिक्स के प्रोफेसर हैं। उन्होंने ऐसा प्रोटीन खोजा, जो रोशनी को विद्युत संकेत में बदल सकता है।
जॉर्ज नागेल: जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्जबर्ग में प्लांट फिजियोलॉजी के प्रोफेसर हैं। उन्होंने हेगेमैन के साथ मिलकर पता लगाया कि इन प्रोटीन में लाइट-गेटेड आयन चैनल होता है। रोशनी पड़ने पर यह चैनल विद्युत संकेत पैदा करता है। नोबेल कमेटी के सदस्य एल मनिरा ने इसे वह ‘स्विच’ बताया, जिसकी मदद से वैज्ञानिक इस प्रोटीन को सक्रिय कर सकते हैं।

09:12 AM5 अक्टूबर 2026
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पिछले 10 सालों में मेडिसिन में मिले नोबेल
09:09 AM5 अक्टूबर 2026
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नोबेल कमेटी सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन विजेता का ऐलान करेंगे
नोबेल कमेटी के सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन इस साल के फिजियोलॉजी या मेडिसिन नोबेल पुरस्कार के विजेता का ऐलान करेंगे। पुरस्कार की घोषणा से कुछ ही पल पहले नोबेल कमेटी ने इसकी जानकारी दी है।
तस्वीर नोबेल कमेटी के सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन की है।
09:07 AM5 अक्टूबर 2026
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2026 के नोबेल प्राइज का शेड्यूल
09:03 AM5 अक्टूबर 2026
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5 वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में
1. स्वेतलाना मोइसोव: वजन घटाने वाली दवाओं की नींव
स्वेतलाना मोइसोव ने GLP-1 हार्मोन के उस हिस्से की पहचान करने में अहम भूमिका निभाई, जो शरीर पर सबसे ज्यादा असर करता है। GLP-1 भूख और ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। उनकी रिसर्च ने आगे चलकर मोटापा और डायबिटीज की दवाओं का रास्ता खोला। इस काम में डैनियल ड्रकर और जेन्स जूल होल्स्ट का भी अहम योगदान रहा।
2. डैनियल ड्रकर: GLP-1 को इलाज तक पहुंचाया
डैनियल ड्रकर ने GLP-1 के शरीर पर असर को समझने में अहम योगदान दिया। उनकी रिसर्च से पता चला कि यह हार्मोन इंसुलिन, ब्लड शुगर और भूख को कैसे प्रभावित करता है। उनके काम ने GLP-1 आधारित दवाओं को डायबिटीज और मोटापे के इलाज तक पहुंचाने में मदद की।
3. डेविड लियू: DNA में सटीक बदलाव
डेविड लियू ने जीन एडिटिंग की ऐसी तकनीकें विकसित कीं, जिनसे DNA में खास हिस्सों को ज्यादा सटीक तरीके से बदला जा सकता है। उनकी बेस एडिटिंग और प्राइम एडिटिंग तकनीकों का इस्तेमाल आनुवंशिक बीमारियों के इलाज की दिशा में किया जा रहा है। उनका नाम मेडिसिन के साथ 2026 केमिस्ट्री नोबेल की चर्चाओं में भी है।
4. डेनिस स्लैमोन: कैंसर की लक्षित दवा
डेनिस स्लैमोन ने स्तन कैंसर में HER2 जीन की भूमिका समझने में अहम काम किया। उनकी रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल से हर्सेप्टिन जैसी लक्षित दवा के विकास का रास्ता खुला। यह दवा HER2-पॉजिटिव स्तन कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव लेकर आई।
5. टिमोथी स्प्रिंगर: ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज की दिशा
टिमोथी स्प्रिंगर ने यह समझने में अहम योगदान दिया कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं एक-दूसरे को कैसे पहचानती और जोड़ती हैं। उनकी रिसर्च से ऐसी दवाओं के विकास में मदद मिली, जिनका इस्तेमाल ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में होता है।










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