
चंडीगढ़ पीजीआई
– फोटो : अमर उजाला
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विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें टेंडिनाइटिस के कारण खेल बीच में छोड़ने की नौबत नहीं आएगी। क्योंकि पीजीआई के विशेषज्ञों ने स्टेम सेल की बजाय उसके फैक्टर से इसके इलाज का बेहतर तरीका तलाश लिया है।
संस्थान में सीजीएमपी लैब स्थापित होने के बाद इसका ह्यूमन ट्रायल शुरू किया जाएगा। फिलहाल इसके एनिमल ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी गई है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द ही नई तकनीक से इस मर्ज का परमानेंट और तीव्र रफ्तार से इलाज होगा।
पीजीआई के ट्रांसलेशनल एंड रिजनरेटिव मेडिसिन की डॉ. अरुणा राका ने बताया कि अब तक टेंडिनाइटिस के मरीजों का इलाज स्टेम सेल थेरेपी के साथ ही अन्य तकनीकों से किया जा रहा है। लेकिन इसका दूरगामी परिणाम नहीं मिल रहा है। इन तकनीकों से किए गए इलाज में रिलेप्स यानि दोबारा परेशानी होने और संक्रमण का खतरा रहता है। ऐसे में खिलाड़ियों का भविष्य प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसलिए इस मर्ज के इलाज के लिए विभाग प्रमुख प्रो. रीना दास के नेतृत्व में नए आयाम पर काम करना शुरू किया गया। जिसके अंतर्गत लैब में स्टेम सेल के कल्चर के दौरान उससे प्राप्त होने वाले फैक्टर का उपयोग करके इनवीट्रो मॉडल (मानव की जगह उसके हेल्दी सेल पर) पर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं।
बेकार टिशू को बनाया माध्यम
डॉ. अरुणा ने बताया कि विभाग के एमएसी छात्र विनोद मिश्रा के थिसीस पर उन्होंने हड्डीरोग विभाग के डॉ. देवेन्द्र चौहान के साथ मिलकर काम शुरू किया। इसमें एसीएल सर्जरी के दौरान फेंके जाने वाले टिशू को लेकर उसे लैब में कल्चर किया। उससे बनने वाले फैक्टर का उपयोग इंजरी मॉडल पर किया। जिसके बाद उसकी जांच करने पर स्टेम सेल की तुलना में और अच्छे परिणाम प्राप्त हुए। इम्यूनिटी रियेक्शन पाजिटिव डायरेक्शन में हुआ, वहीं क्षतिग्रस्त टिशू की रिकवरी भी तेज हुई।
सीजीएमपी लैब इसलिए है महत्वपूर्ण
सीजीएमपी का तात्पर्य एफडीए द्वारा लागू वर्तमान अच्छे विनिर्माण अभ्यास विनियमों से है। सीजीएमपी ऐसी प्रणालियों के लिए अनुमति प्रदान करता है जो विनिर्माण प्रक्रियाओं और सुविधाओं के उचित डिजाइन, निगरानी और नियंत्रण को सुनिश्चित करती हैं। सीजीएमपी विनियमों का पालन दवा उत्पादों की पहचान, शक्ति, गुणवत्ता और शुद्धता को सुनिश्चित करता है, जिसके लिए दवाओं के निर्माताओं को विनिर्माण संचालन को पर्याप्त रूप से नियंत्रित करना आवश्यक है।
टेंडिनाइटिस आप भी जान लें
टेंडोनाइटिस टेंडन की सूजन है। यह आमतौर पर तब होता है जब कोई व्यक्ति शारीरिक गतिविधि के दौरान टेंडन का अधिक उपयोग करता है या उसे घायल कर देता है। यह एड़ी, कंधे, कोहनी और अन्य जोड़ों में टेंडन को प्रभावित कर सकता है।
इसके खिलाड़ियों को खतरा ज्यादा
बेसबॉल
बास्केटबाल
बॉलिंग
गोल्फ
दौड़ना
तैराकी
टेनिस
शरीर के इन भाग को ज्यादा खतरा
कंधे (रोटेटर कफ), हाथ, बांह का ऊपरी भाग, एड़ी का पिछला हिस्सा, घुटने की साइड का हिस्सा, हिप की हड्डी के पास।
ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार
- जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना या गलत तरीके से व्यायाम करना
- एक ही गतिविधि को बार-बार करना
- कुछ विकारों जैसे, रूमैटॉइड अर्थराइटिस, सिस्टेमिक स्क्लेरोसिस, गठिया, शुगर।











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