काठमांडू3 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

नेपाल सरकार ने युवाओं के भारी विरोध के बाद सोमवार देर रात सोशल मीडिया से बैन हटा लिया है। कैबिनेट बैठक के बाद संचार मंत्री प्रिथ्वी गुरुंग ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की बात मान ली हैं। हमने सोशल मीडिया ओपन कर दिया है। युवा अब विरोध बंद कर दें।
इससे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से रोक हटाने से इनकार कर दिया था। इस प्रदर्शन की अगुआई Gen-Z यानी 18 से 28 साल के युवाओं ने की थी। कल इस विरोध-प्रदर्शन में 20 लोग मारे गए थे, जबकि 400 से ज्यादा घायल हुए थे।
UN मानवाधिकार ऑफिस ने भी इस हिंसा पर दुख जाहिर की है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।


संसद भवन के बाहर जमा प्रदर्शनकारियों की भीड़।

कुछ लोगों ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन में घुसने की कोशिश की।

पुलिस ने प्रदर्शन को काबू करने के लिए बल प्रयोग भी किया।

लोगों ने प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर खड़ी कार में आग लगा दी।

ग्लोबल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट के 12 के छात्रा श्रीयम चौलागैन की प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई।
सरकार ने 3 सितंबर को सोशल मीडिया बैन किया था
नेपाल सरकार ने 3 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाने का फैसला किया था।
इन प्लेटफॉर्म ने नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इसके लिए मंत्रालय ने 28 अगस्त को आदेश जारी कर 7 दिन का समय दिया था, यह समय सीमा 2 सितंबर को खत्म हो गई।
नेपाल में सोशल मीडिया बंद क्यों हुआ?
नेपाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 7 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश दिया था। सरकार का तर्क था कि रजिस्ट्रेशन के बिना ये प्लेटफॉर्म्स देश में फेक ID, हेट स्पीच, साइबर क्राइम और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।
तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया था। इसमें व्हाट्सअप, फेसबुक, यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म थे। टिकटॉक, वाइबर जैसे प्लेटफॉर्म पर बैन नहीं लगा, क्योंकि उन्होंने समय पर रजिस्ट्रेशन करा लिया था।

प्रदर्शनकारी कल नेपाल के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के वॉन्टेड वाले पोस्टर लेकर निकले थे।
यूट्यूब जैसी 26 कंपनियां रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं करा सकीं
नियमों के मुताबिक हर कंपनी को नेपाल में लोकल ऑफिस रखना, गलत कंटेंट हटाने के लिए लोकल अधिकारी नियुक्त करना और कानूनी नोटिसों का जवाब देना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार के साथ यूजर डेटा शेयर करने के नियम भी मानना जरुरी कर दिया गया।
कंपनियों को डेटा-प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी के मामले में ये शर्तें बहुत सख्त लग रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत या यूरोप जैसे बड़े देशों में कंपनियां लोकल प्रतिनिधि रख लेती हैं, क्योंकि वहां यूजर बहुत ज्यादा हैं। लेकिन नेपाल का यूजर बेस छोटा है, इसलिए कंपनियों को यह बेहद खर्चीला लगा।
अगर कंपनियां नेपाली सरकार की यह शर्त मान लेती हैं, तो उन पर अन्य छोटे देशों में भी इन नियमों को पालन करने का दबाव पड़ता, जो काफी खर्चीला है। यही वजह रही कि पश्चिमी कंपनियों ने नेपाल सरकार की शर्त नहीं मानी और तय समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया।











![JMA – Ninja & Deep Jandu [Official MV] Kaptaan JMA – Ninja & Deep Jandu [Official MV] Kaptaan](https://i.ytimg.com/vi/-dsfIh319s0/maxresdefault.jpg)











