
नवजोत सिद्धू
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पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने भाजपा में जाने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। सिद्धू ने कहा कि यह बात वह एक बार नहीं, बल्कि हजार बार खत्म कर चुके हैं। पंजाब व कांग्रेस के आला नेताओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता न तो एक इंच भी पीछे हटी है और न ही पीछे हटेगी।
वहीं सिद्धू ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बड़ा हमला बोलते उन्हें शेखचिल्ली बताया। सिद्धू ने कहा कि केवल गेहूं पर एमएसपी देने पर 75 हजार करोड़ खर्च होते हैं, लेकिन मान ने झूठ बेचते हुए 22 फसलों पर एमएसपी देने के बड़े-बड़े दावे कर दिए। इसलिए जरूरत है कि पंजाब के लोग इनकी असलियत पहचानें और इन्हें किनारे करें। सिद्धू ने मान को बिचौलिया करार दिया और कहा कि पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी के कार्यकाल में बीएसएफ के पंजाब में अधिकार क्षेत्र में वृद्धि होने पर उन्हें घेरते थे। अब क्या मान की केंद्रीय मंत्रियों के साथ सांठगांठ हो गई है।
किसानों के हक में सिद्धू ने कहा कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) को बीते 10 वर्षों में केंद्र ने दिवालिया बनाकर अब सारी स्टोरेज अदाणी को दे दी है। बड़ी बात यह कि 20 फीसदी स्टोरेज का भी अदाणी को 100 फीसदी भुगतान किया जा रहा है, लेकिन किसानों को एमएसपी नहीं दे सकते। तभी किसान अपनी जायज मांगों के लिए आज सड़कों पर हैं।
सिद्धू ने कहा कि किसान भारतवासियों की पहचान हैं। किसानों को चाहिए कि इकट्ठे होकर मांगों की पूर्ति के लिए रोडमैप दें। जो पार्टी उनकी मांगों को माने, उसे वोट दें। केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने व एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन बीते 10 वर्षों में खाद के दाम 30 प्रतिशत बढ़ा दिए। इससे खेती लागत बढ़ती गई, लेकिन एमएसपी पर हर साल 40 रुपये और चुनावी साल में 100 रुपये बढ़ाए। ऐसे में किसान कैसे तरक्की कर सकता है। अब किसान अगर मांगों को लेकर दिल्ली कूच करना चाहता है, तो उस पर जबर किया जा रहा है। यह कहां का इंसाफ है।
मोदी सरकार ने पूरे नहीं किए वादे
सिद्धू ने कहा कि देश की शान महिला पहलवानों के साथ भी नाइंसाफी की गई। देश के लिए मेडल लाने वाली महिला पहलवानों को धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। सिद्धू ने कहा कि जवाब उनसे ही मांगा जाएगा, जो सत्ता में होगा। निशाना साधते कहा कि मोदी सरकार ने वादा किया था कि दो करोड़ नौकरियां देंगे। काला धन वापस लाएंगे, 15 लाख रुपये देंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। दावे करते हैं कि भारत की अर्थव्यस्था ट्रिलियन करेंगे, लेकिन यह तब तक संभव नहीं जब तक देश में गरीबी, कुपोषण और अनाज से होने वाले प्रदूषण की समस्या है। बीते कईं सालों से बीपीएल सर्वे नहीं कराया। ऐसे में केंद्र कैसे गरीबों के कल्याण के लिए योजनाएं लाएगी।


























