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- Manipur Violence Update| 30 Militant Groups Again Active Using Stolen Weapons And Artilery
इंफाल16 मिनट पहलेलेखक: एम. देवानंद शर्मा
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मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी संगठन UNLF ने 29 नवंबर को राज्य सरकार के साथ शांति समझौते पर साइन करके हिंसा छोड़ने का ऐलान किया था।
4 दिसंबर को मणिपुर के टेंगनाउपोल जिले के लीथू गांव के पास जंगल में 13 लोगों के शव मिले थे। जांच में पता चला कि ये सभी मैतेई उग्रवादी समूह द रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ) की पॉलिटिकल विंग पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के थे और म्यांमार हथियारों की ट्रेनिंग लेने जा रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक इस घटना के बाद पूरे राज्य में उग्रवादियों की मौजूदगी की पड़ताल शुरू कराई गई, जिसमें पता चला कि 3 मई से जारी हिंसा की आड़ में करीब 30 उग्रवादी समूह फिर से एक्टिव हो गए हैं। ये वे संगठन हैं, जो 2019 के बाद की गई केंद्र सरकार की सख्ती के चलते अंडरग्राउंड हो गए थे।
फिलहाल राज्य में 8 मैतेई तो 18 कुकी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं। कुछ नगा उग्रवादी भी छिटपुट घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इन सभी संगठनों के पास हिंसा के दौरान पुलिस से लूटे गए 75% हथियार और 95% गोलियां हैं। सीएम बीरेन सिंह की चेतावनी के बावजूद लोग हथियार सरेंडर नहीं कर रहे हैं। अब आशंका ये है कि इन उग्रवादियों की आड़ में कहीं 25 निष्क्रिय समूह दोबारा सक्रिय न हो जाएं।

24 अक्टूबर को मणिपुर के वांगू लाइफाम इलाके में काकचिंग पुलिस के सर्च आपरेशन में घरों और पहाड़ी से बड़ी संख्या में हाईटेक हथियार और चीनी ग्रेनेड बरामद किए गए।
8 माह में 5,600 में से 1500 हथियार मिले
मणिपुर हिंसा के बाद 5,600 से ज्यादा हथियारों ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 8 महिनों में अभी तक 1400 हथियार ही वापस मिले हैं। जो लूटे गए हथियारों के एक चौथाई से भी कम हैं। जबकि गोलियां तो सिर्फ 5% ही मिल पाई हैं।
18 कुकी उग्रवादी समूह, दो सबसे ज्यादा सक्रिय
मणिपुर में 18 कुकी उग्रवादी समूह हैं। इनमें से सबसे ज्यादा सक्रिय कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (केआरए) और कुकी नेशनल आर्मी (केएनए) संगठन हैं। कुकी उग्रवादी समूहों ने 2008 में सरकार के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

आठ मैतेई संगठनों पर यूएपीए प्रतिबंध बढ़ाया
सशस्त्र संघर्ष के जरिए मणिपुर को भारत से अलग करने की वकालत करने वाले 8 मैतेई चरमपंथी संगठनों के खिलाफ गृह मंत्रालय ने 13 नवंबर 2023 को यूएपीए प्रतिबंध बढ़ा दिया था। सभी 8 संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से संबंधित हैं।

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मणिपुर फायरिंग में मारे गए 13 लोग मैतेई थे:कुकी बहुल इलाके में दूसरे गुट ने गोलीबारी की थी, ज्यादातर की उम्र 20 से 25 साल

मणिपुर में 4 दिसंबर को दो गुटों के बीच गोलीबारी में मारे गए 13 लोगों पहचान हो गई है। ये सभी मैतेई समुदाय के हैं। घटना म्यांमार बॉर्डर से लगे कुकी बहुल टेंग्नौपाल जिले के लीथू गांव में हुई थी। मारे गए लोगों में से अधिकतर की उम्र 20 से 25 साल के बीच थी।
जानकारी के मुताबिक, मृतकों का पुलिस में कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस ने कहा कि इन हत्याओं की जांच जारी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, ऐसी आशंका है कि ये सभी लोग हथियारों की ट्रेनिंग लेने के लिए बॉर्डर पार जा रहे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सेना के अफसर ने बताई मणिपुर हिंसा की वजह:कहा- म्यांमार में अशांति का यहां तक असर, जनता के पास हथियार होना भी एक कारण

मणिपुर में 3 मई से हिंसा हो रही है। इंफाल में 26 सितंबर सुरक्षाबलों और स्टूडेंट्स के बीच झड़प हुई थी। तस्वीर उसी दिन की है।
पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलीता ने 16 दिसंबर को कहा कि मणिपुर में हिंसा की सबसे बड़ी वजह कुकी-मैतेई के पास बड़ी संख्या में हथियारों की मौजूदगी और पड़ोसी म्यांमार में अस्थिरता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना और असम राइफल्स ने राज्य पुलिस और CAPF के साथ मिलकर मणिपुर हिंसा को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…












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