जनवरी 2024 में मेरे पति तेजपाल वर्क वीजा पर रूस गए थे। मार्च में पति ने वीडियो कॉल कर बताया कि उन्हें जबरन रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया है। उसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चला और न ही उनकी कोई कॉल आई।
अपनी दर्द भरी दस्तां सुनाते हुए अमृतसर निवासी तेजपाल की पत्नी परमिंद्र कौर ने बताया कि परिवार वालों को जब गड़बड़ी की आशंका हुई तो उन्होंने भारतीय और रूसी दूतावास से संपर्क कर तेजपाल की तलाश के लिए बहुत धक्के खाए। कुछ नहीं बना तो वह रूस गई और वहां भी दूतावास कार्यालयों में भटकती रही। इस पर रूस ने उन्हें उनके पति के संदर्भ में ‘लापता’ के दस्तावेज थमा दिए, लेकिन उसने अपने पति की तलाश और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखा।
अंतत: उसने रूस जाकर वहां प्राइवेट वकील के जरिये रूसी सरकार के खिलाफ केस लड़ा। अब तीन महीने पहले रूसी सरकार ने उन्हें पति का डेथ सर्टिफिकेट बनाकर थमा दिया है लेकिन पति का शव अभी तक नहीं मिला है और अब उम्मीद भी कम है।
बारूदी सुरंगों से करवाते हैं यूक्रेन के वॉर जोन में एंट्री
महज 25 दिन की ट्रेनिंग के बाद भारत से रूस गए युवाओं को यूक्रेन वॉर में धकेला जा रहा है। 15 दिन की ट्रेनिंग एक शहर में करवाई जाती है जबकि 10 दिन यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात कर वहां हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उसके बाद बारूदी सुरंगों से बॉर्डर क्रास करवा यूक्रेन के वार जोन में झोंक दिया जाता है।


























