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Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 05 Jul 2025 12:28 PM IST

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे
– फोटो : अमर उजाला
बीते हफ्ते राजनीतिक हलके में जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वो राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का साथ आना था। आज मराठी विजय दिवस रैली में दोनों भाई करीब 20 साल बाद एक मंच पर दिखे। राज ठाकरे ने मतभेद के चलते साल 2006 में अलग पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया था। हालांकि राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ खास हासिल नहीं कर सके। वहीं शिवसेना यूबीटी भी बंटवारे के बाद कमजोर है। यही वजह है कि दोनों भाइयों ने मराठी अस्मिता के नाम पर साथ आने का फैसला किया। महाराष्ट्र सरकार के तीन भाषा के फार्मूले के तहत हिंदी पढ़ाने के फैसले ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने की जमीन तैयार की।
कैसे हुई साथ आने की शुरुआत
कुछ माह पहले फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर के पॉडकास्ट में राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे से हाथ मिलाने के संकेत दिए थे। महेश मांजरेकर ने पूछा कि क्या अब भी दोनों भाई साथ आ सकते हैं? इस पर राज ठाकरे ने कहा कि ‘महाराष्ट्र के अस्तित्व, महाराष्ट्र के लोगों के अस्तित्व के सामने हमारे मतभेद कुछ भी नहीं हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि साथ आना कोई बहुत मुश्किल है। सिर्फ इसकी नीयत होनी चाहिए। ये सिर्फ मेरी बात नहीं है और न ही ये मेरे हितों के बारे में है। हमें बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए।’


























