
शहीद नायक जसविन्द्र सिंह और उनका बेटा
– फोटो : संवाद
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राजपुरा के गांव मोही खुर्द के रहने वाले जांबाज नायक जसविन्द्र सिंह ने तीन अक्तूबर 2000 में कारगिल युद्ध में महज 32 वर्ष की उम्र में अपना जीवन बलिदान कर दिया था। वह अपने पीछे मां-बाप, पत्नी, दो बेटियां और एक नवजात बेटे को छोड़ गए थे। अब शहीद जसविन्द्र का बेटा हरदीप सिंह भी अपने पिता के नक्शे कदमों में चलते हुए सेना में भर्ती हो गया है। महज 19 साल के हरदीप अपने शहीद पिता की 17 सिख रेजिमेंट में नियुक्त हुए हैं। फिलहाल वह असम में सिपाही कार्यरत हैं।
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बेटे की कुर्बानी पर आज भी छाती चौड़ी
23 वर्ष बीत गए लेकिन शहीद के बुजुर्ग मां-बाप जगतार सिंह व अमर कौर को अपने बेटे की कुर्बानी पर आज भी नाज है। वे कहते हैं कि बेटे ने देश की खातिर अपना कर्तव्य निभाया। जब भी कारगिल विजय दिवस मनाया जाएगा, बेटे को पूरा देश याद करता रहेगा। नायक जसविन्द्र सिंह ने सेना में ज्वाइन करने के 12 वर्ष बाद ही देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
शहीद बेटे की घर में ही बनवाई यादगार
नायक जसविन्द्र सिंह के माता-पिता ने भी अपने बेटे की शहीदी को समर्पित घर की छत पर विशाल प्रतिमा लगवाई है। परिवार के लोग 26 जुलाई व शहीद के जन्म दिन पर फूल मालाओं के साथ पूरे जोश से सम्मान समारोह आयोजित करते हैं।
शहीद से प्रेरित होकर पांच नौजवान हुए फौज में भर्ती
गांव मोही खुर्द निवासी सेवामुक्त नायब सूबेदार कुलवंत सिंह ने कहा कि नायक जसविन्द्र सिंह और वह एक ही बैच के हैं। हम दोनों वर्ष 1988 में एक साथ फौज में भर्ती हुए थे। जसविन्द्र 12 वर्ष बाद ही मेरा साथ छोड़ गया था लेकिन उनसे प्रेरणा पाकर गांव के ही नरेन्द्र सिंह पुत्र बलविन्द्र सिंह, गुरजंट सिंह पुत्र ज्ञान सिंह, लवप्रीत सिंह पुत्र गुरचरण सिंह, शहीद जसविन्द्र सिंह का बेटा हरदीप सिंह व मेरा बेटा जसविन्द्र सिंह भी फौज में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।
शहीद नायक की दो बेटियों की हो चुकी है शादी
शहीद नायक जसविन्द्र सिंह की पत्नी हरविन्द्र कौर अभी एसडीएम ऑफिस राजपुरा में सुपरिंटेंडेंट पद पर तैनात हैं। उनकी दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। बड़ी बेटी जसप्रीत कौर की शादी अंबाला और छोटी बेटी कोमलप्रीत कौर की शादी नजदीकी गांव घड़ामा में की गई है। जबकि नायक जसविन्द्र की शहादत के बाद जन्मे बेटे हरदीप सिंह को पिता के अधूरे सपने को साकार करने के लिए तीन वर्ष पहले फौज में भर्ती करवा दिया गया है।
शहीद की याद में गेट, लाईब्रेरी व स्टेडियम बनाने का था वायदा
गांव के सरपंच व कारगिल शहीद जसविन्द्र के भाई तेजिन्द्र सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ने शहीद की याद में यादगारी गेट, लाईब्रेरी व स्टेडियम बनवाने का वायदा किया था। पिछले वर्ष गेट बनना शुरू हुआ है लेकिन काम अधूरा है। लाइब्रेरी की इमारत तो बन गई है लेकिन उसमें किताबें नहीं पहुंची। स्टेडियम के लिए अभी तक प्रदेश सरकार ने जमीन उपलब्ध नहीं करवाई है। परिवार के लोगों ने घर की छत पर ही शहीद की प्रतिमा लगवाई है ताकि शहीद की याद को जिंदा रखा जा सके।

























