2 मिनट पहले
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फुटेज में इजराइल की कैद से रिहा होकर घर लौटी मलक अपनी मां से लिपटकर रोती नजर आ रही है।
इजराइल-हमास जंग के बीच दोनों पक्षों में हुए समझौते के बाद शुक्रवार को सीजफायर हुआ। 24 नवंबर की रात को हमास ने इजराइली बंधकों और इजराइल ने फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया। जिन 39 कैदियों की रिहाई हुई उनमें 15 बच्चे और 24 फिलिस्तीनी महिलाएं हैं।
अपनों की घर वापसी पर वेस्ट बैंक में कई जगहों पर जश्न का माहौल है। लोग आतिशबाजी करके परिजनों के लौटने की खुशी मना रहे हैं। रिहा हुए कई कैदी सालों बाद अपनों से मिलते नजर आए। जिन फिलिस्तीनी को इजराइल ने रिहा किया है, उनमें से एक है 24 साल की मलक सलमान।

तस्वीर में 24 साल की मलक अपनी मां से घर वापसी के बाद अपनी मां से लिपटकर रोती नजर आई।
इजराइली सुप्रीम कोर्ट तक गई थी मलक की मां
CNN के मुताबिक, चाकूबाजी के आरोप में इजराइली पुलिस ने उसे 16 साल की उम्र में गिरफ्तार किया था। 17 साल में उस पर आरोप तय करके उसे 10 साल की सजा सुनाई गई। मलक के घर वालों का कहना है कि उस पर गलत आरोप लगाए गए थे। मलक की मां और उसके वकील इजराइल के सुप्रीम कोर्ट तक गए थे लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ था।
मलक को 2025 में छोड़ा जाना था। शुक्रवार को घर लौटते ही उसकी मां ने उसे गले से लगा लिया। दोनों बहुत देर तक एक-दूसरे से लिपटकर खुशी मना रही थीं। उनकी आंखों में आंसू थे। मलक की मां फातिना सलमान ने AFP को बताया कि इजराइली पुलिस फिलिस्तीनियों को घर पर रहने को कह रही है। उन्हें कैद से रिहा हुए परिजनों से मिलने से रोका जा रहा है।
फिलिस्तीनी महिला बोली: गाजा के लोगों की बदौलत रिहाई हुई
खालिज टाइम्स के मुताबिक, दो महीने तक इजराइली हिरासत में रहने के बाद रिहा हुए 58 साल की हना अल-बरगौटी ने हमास, उसके नेता और गाजा के लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा- अल्लाह उनका भला करे। गाजा के लोग अगर नहीं होते तो शायद हमें ये आजादी नसीब नहीं होती। हम जेलों में बंद थे। लोग हमारी बेइज्जती करते थे, हमें प्रताड़ित करते थे। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और इसका हमें फल मिला है।
तस्वीर 58 साल की हना अल-बरगौटी की है। उन्होंने अपनी घर वापसी का श्रेय हमास और गाजा के लोगों को दिया है।
गोल्फ कार्ट में अगवा कर ले गए थे हमास लड़ाके
7 अक्टूबर को हमास के लड़ाके करीब 250 इजराइलियों को बंधक बनाकर ले गए थे। इनमें से एक 85 साल की याफ्फा अदर भी थीं। इन्हें लड़ाकों ने एक गोल्फ कार्ट में बैठाकर अगवा किया था। याफ्फा के किडनैप होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें वो बेहद शांत नजर आ रही थीं। अगवा होते वक्त उनके चेहरे पर चिंता या परेशानी नहीं थी।
वीडियो देखकर कुछ लोगों ने कहा था कि ज्यादा उम्र होने की वजह से शायद याफ्फा समझ नहीं पा रही हैं कि उन्हें अगवा किया जा रहा है। कई लोगों ने उन्हें डिमेंशिया होने की भी आशंका जताई थी। हालांकि, याफ्फा की पोती ने टाइम्स ऑफ इजराइल को बताया कि उन्हें इस बात का पूरा एहसास था कि उनके आसपास क्या हो रहा है। याफ्फा बहुत ही बहादुर महिला हैं। वो बिलकुल भी डरी नहीं थीं।
तस्वीर 7 अक्टूबर की है, जब हमास के लड़ाके 85 साल की याफ्फा को अगवा करके ले गए थे।
किबुत्ज नीर ओज की संस्थापक हैं याफ्फा
टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, याफ्फा अदर ही इजराइल के किबुत्ज नीर ओज समुदाय की संस्थापक हैं। अदर का सबसे बड़ा पोता तमीर अदर 38 साल का है और अब भी हमास की कैद में है। लेखक आइरिस बोकर ने सोशल मीडिया पर लिखा- वह यहूदियों की भावनाओं, उनके दृढ़ निश्चय का प्रतीक हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि वो हमास या उसे मानने वाले किसी भी व्यक्ति के हाथों हमारे हौसलों को टूटने नहीं देंगी।


























